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छोटे शहरों तक एयरलाइंस की पहुंच बढ़ाने पर जोर: अजित सिंह
नई दिल्ली/हरवीर सिंह
Updated Sat, 20 Oct 2012 12:42 AM IST
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केंद्र सरकार छोटे शहरों तक हवाई यात्रा सुविधाओं को ले जाने के लिए मौजूदा हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों को उपयोग के लिए विकसित करने पर काम कर रही है। वहीं एयरलाइन कंपनियों को महानगरों के अलावा छोटे शहरों तक उड़ान भरने की शर्तों का पालन करने के लिए सख्ती की तैयारी है। घाटे में फंसी सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया को पटरी लाने केलिए भी कवायद जोरों पर है।
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उड्डयन क्षेत्र और एयर इंडिया से संबंधित इन तमाम मुद्दों पर अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह और विशेष संवाददाता अजीत सिंह ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह के साथ लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश:
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सवाल- उड्डयन क्षेत्र की हालत बहुत बेहतर नहीं है और यात्रियों की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है। इस क्षेत्र के लिए आप क्या नया कर रहे हैं जिसका फायदा आम आदमी और उद्योग दोनो को मिले?
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- इसमें कोई दो राय नहीं कि एविएशन बिजनेस बहुत जटिल है। वैश्विक मंदी की वजह से पिछले एक साल के दौरान घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या लगभग स्थिर रही है। लेकिन आने वाले समय में हवाई यातायात 8-9 फीसदी की दर से बढ़ना तय है। देश के आर्थिक विकास के लिहाज से भी एविएशन सेक्टर बहुत अहम है। इसकी कई बुनियादी दिक्कतें हैं, जिन्हें हम हल करने की कोशिश में जुटे हैं। इसकी एक बड़ी वजह भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के ऊंचे दाम हैं। एयरलाइंस कंपनियों का 40-50 फीसदी खर्च ईंधन पर ही हो जाता है। राज्य सरकारें इस पर 30 फीसदी तक वैट लगा रही हैं। वैट कम करना राज्यों के ऊपर है। हमने एयरलाइंस को खुद एटीएफ आयात करने की छूट भी दी है। हम इसे अधिसूचित सूची में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय से बात चल रही है।
सवाल- क्या नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की भूमिका भी बदलने वाली है?
-हां, डीजीसीए की जगह एक सिविल एविएशन अथॉरिटी बनेगी। इसकी भूमिका और दायरा ज्यादा व्यापक होगा। इसके विधेयक का मसौदा हम इसी महीने कानून मंत्रालय को भेज रहे हैं। उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेंगे। अगले सत्र में यह विधेयक संसद में लाने की तैयारी है। दुनिया के अधिकांश देशों में सिविल एविशन के लिए इसी प्रकार की अथॉरिटी हैं।
सवाल- अधिकांश कंपनियां मुनाफे वाले रूट ही चलाना चाहती हैं छोटे शहरों में नहीं जाना चाहती?
-वास्तविकता यह है कि छोटे शहरों में एयरलाइंस जाना नहीं चाहती थी। लेकिन अब उन्हें टियर-2 व टियर-3 शहरों का रुख करना होगा। कई क्षेत्रीय एयरलाइंस और नॉन शेड्यूल ऑपरेटर सामने आए हैं जिन्होंने पंजाब, गुजरात, बंगाल और मध्य प्रदेश में सेवाएं शुरू की हैं। छोटे एअरपोर्ट के निर्माण और छोटे शहरों में सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए हम रूट निर्धारत नीति में अहम बदलाव करने जा रहे हैं। इसके अलावा नॉन शेड्यूल ऑपरेटरों के लिए भी नई गाइडलाइन बन रही हैं। एयरलाइंस को हम भारी कर्ज लेकर बड़े विमान खरीदने के बजाय छोटे विमान खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
सवाल- उत्तर प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार की क्या योजनाएं हैं?
देश की आबादी में 18 फीसदी हिस्सेदारी वाले उत्तर प्रदेश की एविएशन में हिस्सेदारी सिर्फ 2 फीसदी है। हम इस स्थिति को बदलेंगे। हम देश भर के टिअर-2 और 3 शहरों के बीच हवाई यातायात बढ़ावा दे रहे हैं। यूपी में कई जगह सैन्य हवाई अड्डे हैं, जिन्हें विकसित किया जाएगा। झांसी, बरेली, कानपुर और मेरठ के हवाई अड्डों को विकसित कर यहां क्षेत्रीय एयरलाइंस की सेवाएं शुरू करने की योजना है। इसी तरह आगरा में इंटरनेशनल एअरपोर्ट का पूरा खाका तैयार है। लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को जमीन मुहैया करानी होगी। जमीन नहीं मिलने की वजह से आगरा में इंटरनेशनल एअरपोर्ट का मामला अटका है। इस बारे में मैंने उत्तर प्रदेश केमुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिख था लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया है। एक बार फिर मैं उनको पत्र लिख रहा हूं। हमारी कोशिश है कि जहां बड़ी एयरलाइंस नहीं जा सकती, वहां नॉन शेड्यूल एयरलाइंस और हेलीकॉप्टर के जरिए हवाई यातायात शुरू हो।
सवाल- एअर इंडिया के पुनरुद्धार पर काफी जोर है क्या इसमें कामयाबी मिलेगी?
-पिछले छह महीनों के दौरान एअर इंडिया के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कैबिनेट ने एअर इंडिया को प्रदर्शन में सुधार की शर्त पर ही 30 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। वर्ष 2007 के बाद एअर इंडिया ने पहली बार 48 करोड़ का परिचालन मुनाफा दिया है जबकि पिछले साल के मुकाबले 557 करोड़ का घाटा कम हुआ है। ऑन टाइम परफार्मेंस पिछले साल के 69 फीसदी से बढ़कर 90 फीसदी हो गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि एअर इंडिया का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और लोगों का इसमें भरोसा भी बढ़ा है।
सवाल- लेकिन कुछ पायलटों का कहना है कि उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है?
-इन बातों में सच्चाई नहीं है। एअर इंडिया के सभी कर्मचारियों को जुलाई 2012 तक वेतन मिला है। सभी नॉन लाइसेंस कर्मचारियों को अगस्त तक का वेतन दिया जा चुका है। जस्टिस धर्माधिकारी समिति की सिफारिशों को मानते हुए सरकार ने एक जुलाई से प्रदर्शन आधारित भत्ता (पीएलआई) समाप्त कर दिया है। लेकिन सभी कर्मचारियों को मई, 2012 तक का पीएलआई भी दिया जा चुका है। वेतन में एक-दो महीने का गैप जरूर है लेकिन पिछले छह महीने से वेतन लगातार मिल रहा है।
सवाल- एअरपोर्ट का शुल्क इतना ज्यादा क्यों है? इसकी मार यात्रियों की जेब पर पड़ती है।
-दरअसल वर्ष 2001 से 2009 तक एअरपोर्ट चार्ज नहीं बढ़ाया गया। इसका नतीजा यह हुआ है कि एअरपोर्ट अथॉरिटी को पिछले ढाई साल में पांच साल का चार्ज वसूला। दिल्ली और मुंबई एअरपोर्ट पर लगने वाले एअरपोर्ट विकास शुल्क (एडीएफ) को सरकार ने आगामी एक जनवरी से खत्म कर दिया है। इससे यात्रियों को जरूर राहत मिलेगी।
सवाल- क्या किंगफिशर एयरलाइंस के उड़ान भरने की कोई उम्मीद दिख रही है?
-किंगफिशर पर बैंकों का भारी कर्ज है, इसलिए उन्हें खुद को रिवाइव करने का मौका दिया गया था। हम स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक कंपनी कर्मचारियों के बकाया भुगतान के अलावा अपनी वित्तीय योजनाओं और तैयारियों से डीजीसीए को संतुष्ट नहीं करती, उसे उड़ान भरने की मंजूरी नहीं मिलेगी। डीजीसीए किंगफिशर को कारण बताओ नोटिस दे चुका है। कंपनी के जवाब के आधार पर डीजीसीए आगे कार्रवाई करेगा।