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खत्म करें बीमे से जुड़ी भ्रांतियां
मयंक बथवाल, डिप्टी सीईओ, बिड़ला सनलाइफ इंश्योरेंस
Updated Sun, 13 Jul 2014 09:04 PM IST
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हाल के वर्षों में हमारे देश के शहरी में जीवन बीमा कराने के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है। इसके बावजूद जीवन बीमा प्लान को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां देखने को मिलती हैं। जैसे कि आमतौर पर लोग बीमा और निवेश को एक साथ जोड़कर देखते हैं या एक-दूसरे का पूरक मानते हैं, तो कतई ठीक नहीं है। बीमे को निवेश न समझ कर वित्तीय सुरक्षा के उपाय के रूप में ही अपनाया जाना चाहिए। इसी तरह कई और भ्रांतियां या मिथक लोगों के बीच प्रचलित हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है।
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युवाओं को जीवन बीमा कवर की जरूरत नहीं
युवाओं में अकसर यह सोच देखने को मिलती है कि उन्हें बीमा कराने के जरूरत नहीं है यह उम्र दराज लोगों के लिए है। वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है, क्योंकि जीवन बीमा खरीदने का सबसे उपयुक्त समय तभी होता है, जब आप युवा और स्वस्थ्य हों। देरी करने पर आप कम प्रीमियम पर बीमा खरीदने का अवसर खो देते हैं। उम्र बढ़ने और स्वास्थ्य बिगड़ने जैसी स्थितियों के चलते बीमा पॉलिसी लेना महंगा होता जाता है। इसलिए युवा अवस्था में ही बीमा खरीद लेने में ही बुद्धिमानी है।
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बीमा पॉलिसी लेने के साथ ही पूरा हो जाता है कर्तव्य
अकसर लोग बीमा पॉलिसी लेने के बाद इस बारे में सोचना बंद कर देते हैं। यह सही नहीं है, क्योंकि समय व हालात के साथ आपकी व आपके परिवार की वित्तीय सुरक्षा संबंधी जरूरतें बदलती रहती हैं। इसलिए बीमा कराने के बाद भी समय-समय पर यह समीक्षा करते रहना चाहिए कि क्या यह बीमा कवर परिवार के लिए पर्याप्त है। कमी नजर आने पर अपनी मौजूदा पॉलिसी को टॉप-अप जैसे विकल्पों के साथ और कारगर बनाया जा सकता है।
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पर्याप्त है कंपनी की ओर से मिला ग्रुप टर्म इंश्योरेंस
ऐसा कुछ स्थितियों में हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में नियोक्ताओं (कंपनी) द्वारा मुहैया कराया गया कवर आपके परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिये पर्याप्त नहीं होता। कुछ नियोक्ता सीमित कवर ही उपलब्ध कराते हैं, जैसे कि दुर्घटना में हुई मौत। इसमें बीमारी इत्यादि पर कवर उपलब्ध नहीं कराया जाता है। इसलिए अपनी ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के दायरे को समझना और उसकी समीक्षा करना जरूरी है। इसके बाद जरूरत महसूस करने पर अलग से व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी लेने के बारे में भी सोचा जा सकता है।
मृत्यु या मेच्योरिटी के बाद ही मिलता बीमे का लाभ
जीवन बीमा पॉलिसियों को लेकर एक आम धारणा यह है कि इसका लाभ बीमाधारक को नहीं, उसके परिजनों को मिलता है, वह भी बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद। पॉलिसीधारक को पॉलिसी के मेच्योर होने के बाद ही इसमें कुछ लाभ मिलता है। वास्तविकता यह है कि जीवन बीमा पॉलिसी में पॉलिसीधारक के जीवित रहते भी कई फायदों की पेशकश की जाती है। इनमें निकासी द्वारा पॉलिसी का नकद मूल्य प्राप्त करना या अन्य जरूरतों जैसे कि बच्चे की शिक्षा के लिए, सेवानिवृत्ति आय या अन्य जीवनकालिक बचत जरूरतों के लिये कर-रहित लोन शामिल हैं। इस प्रकार यह न सिर्फ आपातकालीन स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि जरूरत के समय के लिये एक बचत की तरह भी काम आता है।