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विकास दर को झटका दे सकता है अल-नीनो
Updated Fri, 09 May 2014 04:32 PM IST
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अल-नीनो की मार के इस साल मानसून के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था और विकास दर पर पड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
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औद्योगिक संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, अल-नीनो प्रभाव के चलते मानसून में 5 फीसदी की कमी आने से विकास दर को तगड़ा झटका लग सकता है। बारिश में कमी से न सिर्फ खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि अकुशल कामगारों की लाखों नौकरियों का नुकसान हो सकता है।
एसोचैम ने कमजोर मानसून की आशंका के मद्देनजर फसल बीमा और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है।
देश में करीब 60 फीसदी कृषि क्षेत्र मानसून की बारिश पर निर्भर है। अगर बारिश में एक फीसदी की कमी आती है, तो इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.35 फीसदी की कमी आएगी।
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इसलिए बेहतर मानूसन कृषि उत्पादन के साथ-साथ देश में वस्तुओं और सेवाओं की मांग व खपत के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का करीब 30 फीसदी मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर कच्चे माल के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। अच्छा मानसून इन उद्योगों को सस्ते दाम पर कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
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