चालू वित्त में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
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प्रणब सेन का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। सेन के अनुसार साल 2009 में जब उस समय पिछले 35 साल का सबसे खराब मानसून था, तब भी विकास दर 6.5 फीसदी की दर रही थी। उनके अनुसार आर्थिक सर्वेक्षण में 5.4 -5.9 फीसदी की विकास दर का अनुमान को काफी कम संभलकर रखा गया है।
सूखे की आशंका के बावजूद ऊंची रह सकती है विकास दर बुधवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के चेयरमैन प्रणब सेन ने छठी आर्थिक गणना के प्रारंभिक अनुमान जारी करते हुए यह बात कही है। उनके अनुसार अभी हम फसल के आधार पर मानसून से होने वाले असर का आंकलन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में सूखे के असर का निश्चित करना मुश्किल है। इसी तरह उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे को 4.1 फीसदी पर रखने को लक्ष्य को प्राप्त करना मुश्किल नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2008-09 में जब खराब मानसून की वजह से कृषि विकास दर 0.4 फीसदी रही थी, उस साल विकास दर 6.7 फीसदी रही थी। इसी तरह साल 2009-10 में कृषि विकास दर 1.5 फीसदी रहने के बावजूद विकास दर 8.6 फीसदी की दर से बढ़ी थी।
आठ साल में रोजगार में 34.35 फीसदी की बढ़ोतरी छठे आर्थिक गणना के अनुसार पिछले आठ साल में देश में रोजगार प्राप्त लोगों की संख्या में 34.35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। देश में कुल 12.77 करोड़ लोग हैं, जिन्हें रोजगार प्राप्त है। इस अवधि में शहरों में रोजगार पाने वालों की संख्या में 37.46 फीसदी बढ़ी है, वहीं ग्रामीण इलाकों में 31.59 फीसदी का इजाफा हुआ है। पांचवीं आर्थिक गणना आठ साल पहले 2005 में की गई थी।इस अवधि में महिलाओं की रोजगार में भागीदारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोंनो में तेजी से बढ़ी है। शहरी क्षेत्रो में हिस्सेदारी 20 फीसदी से बढ़कर 25.56 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रो में 19.8 फीसदी से बढ़कर 30.9 फीसदी हो गई है।
पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा हुई रोजगार दर में बढ़ोतरी मणिपुर, असम, सिक्किम में सबसे ज्यादा रोजगार दर में बढ़ोतरी हुई है। मणिपुर में यह 83.29 फीसदी, असम में 78.84 फीसदी, सिक्किम 77.14 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 75.26 फीसदी ग्रोथ रही है। वहीं गुजरात देश के 10 सबसे ज्यादा रोजगार दर में बढ़ोतरी करने वाले राज्यों में नौवें नंबर पर रहा है। गुजरात में 56.47 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।