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आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा आशावादी देश भारत: रिपोर्ट

Wed, 25 Jun 2014 05:59 PM IST
एजेंसी
एजेंसी Updated Wed, 25 Jun 2014 05:59 PM IST
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economicaly india is most optimistic
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में कारोबार के अनुकूल सरकार बनने से भारत अगले छह माह के लिए आर्थिक रूप से दुनिया में सबसे ज्यादा आशावादी देश बन गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सर्वे में 60 फीसदी भारतीयों का अनुमान था कि अगले छह माह में घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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इससे भारत रिसर्च फर्म इपसॉस द्वारा तैयार की गई 25 देशों की सूची में शीर्ष पर आ गया है। इसके अलावा भारत का आर्थिक विश्वास 6 अंक बढ़ कर 66 फीसदी पर पहुंच गया है। इससे भारत सबसे ज्यादा आर्थिक विश्वास वाले देशों की सूची में चौथे नंबर पर पहुंच गया है।
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इस सूची में सऊदी अरब, जर्मनी और चीन का स्थान भारत से उपर है। सऊदी अरब के 87 फीसदी लोगों ने अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी राय दी है। इससे सऊदी अरब इस सूची में शीर्ष पर है। कनाडा इस सूची में भारत के बाद पांचवे स्थान पर हैं। कनाडा के 65 फीसदी लोग अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी हे। इपसाॅस की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आर्थिक भरोसा बढ़ने का प्रमुख कारण स्पष्ट जनादेश के साथ केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनी कारोबार के अनुकूल सरकार है।
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मोदी सरकार ने आर्थिक विकास की गति तेल करने, महंगाई पर काबू पाने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने का वादा किया है। 25 देशो के 19,242 लोगों के बीच किए गए सर्वे में पाया गया है कि पहली बार भारत अगले छह माह में आर्थिक विकास के लिहाज से सबसे ज्यादा आशावादी देशों की सूची में शीर्ष पर पहुंचा है।

इस कैटेगरी में भारत के बाद ब्राजील दूसरे स्थान पर, सऊदी अरब तीसरे स्थान पर, इंडोनेशिया चौथे स्थान पर और चीन पांचवे स्थान पर है। इपसॉस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिक गोर्डन का कहना है कि इपसॉस की रिपोर्ट में सभी आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि भारत का आर्थिक भरोसा बड़े पैमाने पर बढा है।


इसको इस तथ्य से भी बल मिलता है कि भारत का चालू खाता घाटा काफी कम हुआ है, रुपया स्थिर हुआ है,महंगाई पर अंकुश लगा है, शेयर बाजार का प्रदर्शन अब तक बेहद शानदार रहा है और कॉरपोरेट की आय में सुधार हो रहा है। हालांकि गोर्डन ने कहा है कि खाद्य महंगाई का ऊंचा स्तर, तेल उत्पादक देश इराक में संघर्ष और मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका नई सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
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