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आर्थिक सर्वे: जेटली ने पेश की निराशाजनक तस्वीर

Thu, 10 Jul 2014 01:31 AM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 01:31 AM IST
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Economic Survey: presented a bleak picture by Jaitley

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए अर्थव्यवस्था की निराशाजनक तस्वीर दिखाई है। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान देश की विकास दर 5.4 से 5.9 फीसदी रहने की संभावना जताते हुए उन्होंने अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का जिक्र किया और सार्वजनिक वित्त की स्थिति सुधारने और महंगाई घटाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

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सर्वे में सबसे ज्यादा चिंता बढ़ते राजकोषीय घाटे पर जताई गई है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम् ने राजकोषीय घाटा का लक्ष्य जीडीपी का 4.1 फीसदी निर्धारित किया था। लेकिन नई सरकार इसका लक्ष्य 4.4 से लेकर 4.5 फीसदी रख सकती है। सर्वे में एक और बड़ी चिंता छोटे टैक्स आधार को लेकर जताई गई है। इस समय जीडीपी के नौ फीसदी से भी कम टैक्स संग्रह होता है।

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मानसून की सता रही है चिंता

Economic Survey: presented a bleak picture by Jaitley

वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 5.4 से 5.9 फीसदी की आर्थिक विकास दर का आकलन करने वाले आर्थिक सर्वेक्षण में कमजोर मानसून की चिंता जताई गई है। इस वजह से विकास दर 5.4 फीसदी रहने पर ज्यादा जोर है।

जून में आरबीआई ने जो अनुमान पेश किए थे, उनमें विकास दर 5.5 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। सर्वे में कहा गया है कि पिछले दो साल के दौरान ग्रोथ में गिरावट ज्यादा व्यापक हो गई। उद्योग को इसने खास तौर पर प्रभावित किया। हालांकि इस दौरान महंगाई घटी लेकिन यह अब भी सुविधाजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है।

इस वजह से खाद्य महंगाई में गिरावट नहीं हो रही है।  सर्वे में यह उम्मीद जताई गई है कि महंगाई घटने से ब्याज दरों में गिरावट आ सकती है। इससे निवेशकों में भी विश्वास जगेगा। लेकिन अर्थव्यवस्था के जोखिमों के तौर पर खराब मानसून की आशंका जताई गई है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय हालातों और देश में निवेश के खराब माहौल का भी जिक्र किया गया है।

निवेश बढ़ाने पर रहेगा जोर

Economic Survey: presented a bleak picture by Jaitley

सार्वजनिक वित्त की स्थिति सुधारने के लिए नए राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून लाने की बात की गई, जो सचमुच प्रभावी हो। इसमें बेहतर अकाउंटिंग प्रैक्टिस, ज्यादा पारदर्शिता और बजट प्रबंधन में सुधार पर जोर दिया गया है।

टैक्स व्यवस्था को सरल और स्थिर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए जीएसटी लागू करने की सिफारिश की गई है। डायरेक्ट टैक्स में कम छूट और कर प्रशासन में बदलाव की बात कही गई है।

निवेश बढ़ाने पर हो जोर
कारोबार के माहौल में सुधार और निवेश बढ़ाने के उपाय करने पर जोर होना चाहिए। हालांकि इस ओर कुछ कदम उठाए गए हैं लेकिन सात से आठ फीसदी की विकास दर अगले वित्त वर्ष और उसके बाद ही संभव है।

टैक्स नीतियों को सरल बनाने की जरूरत
बाहरी वजहों से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को संतुलित करने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए निवेश चक्र को दोबारा गति देने और टैक्स नीतियों को सरल बनाने की जरूरत है।

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