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अगले साल से सुधरेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर

Mon, 22 Sep 2014 09:02 AM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 22 Sep 2014 09:02 AM IST
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economic scenario to improve next year

सुस्ती के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था के अगले साल से सुधरने की पूरी उम्मीद है। बशर्ते, सरकार खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में तेजी लाए। यदि ऐसा होता है, तो अगला वित्त वर्ष निश्चित तौर पर अच्छा होगा। कॉमर्शियल वाहनों को प्रमुख रूप से फाइनेंस करने वाली कंपनी श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर उमेश रेवांकर ने ऐसी उम्मीद जताई है। रेवांकर ने अर्थव्यवस्था और सेक्टर से जुड़े तमाम पहलुओं पर अमर उजाला संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव के साथ विस्तार से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश -

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कॉमर्शियल वाहनों में दो साल से ज्यादा समय से सुस्ती बनी हुई है, क्या सुधार के संकेत दिख रहे हैं?
देखिए, अभी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र काफी कुछ अधर में अटका हुआ है। खनन क्षेत्र को लेकर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने वाला है। उसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। जहां तक कॉमर्शियल वाहनों की मांग बढ़ने की बात है, तो जब तक खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में तेजी नहीं आएगी, तब तक कॉमर्शियल वाहनों की मांग नहीं बढ़ेगी।
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ऐसे में क्या अभी सुस्ती का दौर लंबे समय तक चलता रहेगा?
नई सरकार के आने बाद बिजली, सड़क आदि दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। कॉरपोरेट जगत में भी आत्मविश्वास बढ़ा है। जैसे ही खनन क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी, वैसे ही मांग में तेजी आएगी। मुझे पूरी उम्मीद है कि अगला वित्त वर्ष (2015-16) अच्छा होगा। इसकी एक प्रमुख वजह यह भी है कि मानसून असामान्य होने का खतरा टल गया है। जिसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्र से मांग अगले साल तेजी से बढ़ेगी।
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क्या मांग में कमी की एक प्रमुख वजह ब्याज दरों का ऊंचा रहना है, रिजर्व बैंक को क्या ब्याज दरों में अब कटौती करनी चाहिए?
देखिए, ब्याज दरों में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी से मांग पर बहुत फर्क नहीं पड़ता है। अभी वाहनों की मांग में इसलिए कमी है, क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां ठप हैं। यदि मांग रहेगी, तो ज्यादा ब्याज देकर भी लोग वाहन खरीदेंगे। साथ ही मांग आने पर कंपनियों का बिजनेस तेजी से बढ़ेगा। जिससे हर तरह की लागत भी घटेगी। ऐसे में जरूरी है, कि मांग आए, जिसके बाद सभी कुछ सामान्य स्थिति पर आ जाएगा।

नए वाहनों के फाइनेंस की मांग कम होने से क्या पुराने वाहनों की मंाग बढ़ी है, कंपनी के ऑटोमॉल कारोबार की क्या स्थिति है?
इंडस्ट्री में मांग कम होने से खरीदार पुराने कॉमर्शियल वाहनों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। हालांकि, यहां भी बहुत अच्छी स्थिति नहीं है। जहां तक ऑटोमॉल कारोबार की बात है, तो कंपनी इसके तहत प्रमुख रूप से पुराने वाहनों का कारोबार करती है। हमारे इस कारोबार में 20 फीसदी की ग्रोथ है, साल 2016 तक कंपनी देश भर में कुल 60 ऑटोमॉल खोलगी। अभी तक 38 खोले जा चुके हैं।


आर्थिक सुस्ती का असर कंपनी के कारोबार पर किस तरह पड़ा है?
इंफास्ट्रक्चर क्षेत्र में सुस्ती के कारण उम्मीद के मुताबिक कारोबार में तेजी नहीं आई है। ऐसे में खनन और दूसरे प्रमुख क्षेत्रों में तेजी लानी होगी। कंपनी को इस साल अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट में 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। जो कि चालू वित्त वर्ष में 58,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

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