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आर्थिक संकट ने निवेशकों का रुझान सोने में बढ़ाया

नई दिल्ली/कारोबार डेस्क

Updated Mon, 12 Nov 2012 08:44 PM IST
economic crisis boosted investor sentiment in gold
यूरो संकट से कई देशों में उपजे आर्थिक संकट और ग्लोबल उथलपुथल ने दुनियाभर के निवेशकों का रुझान सोने के प्रति अचानक बढ़ा गया। सोने में बढ़े निवेश का अच्छा खासा रिटर्न भी निवेशकों को मिला, जिसके चलते इसमें आकर्षण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। आजकल कमोबेश हर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना शुरू कर दिया है। बाजार विश्लेषकों की माने तो शेयर बाजारों में आई अनिश्चितता और ग्लोबल सुस्ती का सीधा फायदा सोने को पहुंचा है।
आमतौर पर देखा जाए तो छोटी पूंजी वाला निवेशक सोने और शेयर बाजार में से किसी एक को अपना निवेश विकल्प चुनता है। लेकिन पिछले कुछेक साल से ग्लोबल स्तर पर आई उथल पुथल ने निवेशकों का रुझान सोने की तरफ अधिक मोड़ा हैं। यहां तक कि दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने भी यूरो संकट को देखते हुए सोने में अपनी होल्डिंग बढ़ाई।

निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न की बात की जाए तो पिछले एक दशक के दौरान सोना शेयर बाजारों पर भारी पड़ा है। वर्ष 2002 में सोने का भाव 4,300 रुपये प्रति दस ग्राम पर था, जो फिलहाल करीब 32,000 रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास है। इस लिहाज से देखें तो पिछले 10 वर्षों के दौरान सोने ने अपने निवेशकों को करीब 22 फीसदी का कंपाउंड रिटर्न दिया। जबकि, बीएसई सेंसेक्स ने इस अवधि में 19.32 फीसदी का कंपाउंड रिटर्न दिया।

पिछले दस वर्षों के दौरान निवेशकों के लिए सोना और शेयर दोनों की अहम निवेश विकल्प रहे हैं। 2003-08 के दौरान शेयर बाजार ने जहां जबरदस्त उछाल का दौर देखा, वहीं 2008-12 का दौर बाजार के लिए सुस्ती का फेज रहा है। 2002 के शुरू में सेंसेक्स 3,232 अंक पर था। 2008 की शुरुआत में यह 21 हजार के आंकड़े को भी पार कर गया।

हालांकि इसके बाद का दौर शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। 2008 में अमेरिका में सबप्राइम संकट की शुरुआत हुई और इसने शेयर बाजारों को तगड़ा झटका दिया। हालात यह हुए कि बीएसई का सेंसेक्स मार्च 2009 में करीब 8,000 अंक के स्तर तक आ गया। हालांकि, उसी वर्ष नवंबर तक सेंसेक्स एक बार फिर 21 हजारी होने में कामयाब हो गया।

इस तरह कुल मिलाकर देखा जाए तो निवेश के दोनों विकल्पों ने निवेशकों को रिटर्न तो दिया लेकिन सोने का पलड़ा भारी रहा। सबप्राइम संकट के बाद आए यूरो संकट और ग्लोबल उथलपुथल ने निवेशकों को एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर सोचने पर मजबूर किया है।

शेयर बाजार से जुड़े एक विश्लेषक का मानना है कि अब बाजार में भी निवेशक तुलनात्मक रूप से सुरक्षित शेयरों की ओर रुख रहे हैं। जोखिम के लिहाज से आकलन किया जाए तो निवेशक अब पहले से अधिक सतर्क हैं। दूसरी ओर, गोल्ड ईटीएफ ने भी निवेशकों को एक्सचेंज के जरिए सोने में निवेश का बेहतर मौका उपलब्ध कराया, जिसके चलते निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ को भी शामिल करने लगे हैं।
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