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एसएमई एक्सचेंज के नियम आसान करने की तैयारी
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Wed, 31 Oct 2012 11:05 PM IST
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छोटे और मझोले उपक्रमों के लिए शुरू किए गए एसएमई एक्सचेंज में उम्मीद के मुताबिक भागीदारी नहीं आ रही है। इसे देखते हुए अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय ने छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों को और आसान करने की कवायद शुरू कर दी है।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि एसएमई एक्सचेंज के प्लेटफार्म बीएसई और एनएसई दोनों पर खुल चुके हैं। पहले प्लेटफार्म शुरु होने के करीब छह से सात महीने बाद भी अभी तक केवल आठ कंपनियों ने आवेदन किया है, जिसमें से तीन कंपनियां अभी तक सूचीबद्ध हुई है।
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ऐसे में यह तो स्पष्ट है कि अभी भी पूंजी बाजार के जरिए पूंजी जुटाने में छोटे और मझोले कारोबारी कम रुचि ले रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उनको प्रोत्साहित करने के लिए नियमों को और आसान किया जाय। साथ ही एक्सचेंज के फायदे के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
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मंत्रालय इस संबंध में सभी संगठनों से आवश्यक बदलाव के लिए राय ले रहा है। हाल ही में फिसमें के साथ बैठक में कुछ जरूरी सुझाव सामने आए हैं। अधिकारी ने बताया कि जल्द ही सभी संगठनों के सुझाव लेकर मंत्रालय नियमों में बदलाव के लिए वित्त मंत्रालय, सेबी और आरबीआई से संपर्क करेगा।
अधिकारी के अनुसार उद्योग संगठन प्रमुख रुप से बैंकों और विदेशी निवेशकों के लिए एसएमई एक्सचेंज में निवेश को अनिवार्य करने, आईपीओ आने के समय न्यूनतम 50 निवेशकों के होने की अनिवार्यता में कमी करने, मौजूदा लॉट साइज की न्यूनतम सीमा एक लाख रुपये को कम करने और डिस्कलोजर नियमों को आसान करने की प्रमुख रुप से मांग कर रहे हैं। जिसके आधार पर छोटे कारोबारियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
देश में इस समय 2.61 करोड़ छोटे और मझोले कारोबारी है, जिसमें से अधिकतर कारोबारी वर्किंग कैपिटल और कारोबार विस्तार के लिए बैंकों से कर्ज लेकर ही पूंजी जुटाने पर निर्भर है। जिसकी वजह से उनकी पूंजी जुटाने की लागत बढ़ती है।