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'नौकरानी' से उद्यमी तक का सफ़र
Updated Thu, 24 Oct 2013 01:35 PM IST
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ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो ने उत्तर पूर्व ब्राजील के नटाल के नजदीक अपने गांव से साओ पाओल तक का बहुत लंबा सफर तय किया है।
जैसा उनके पिता ने सोचा था अगर सब कुछ वैसा ही हुआ होता तो उनकी बहुत कम उम्र में शादी हो जाती और वो पारंपरिक ग्रामीण जीवन जी रही होतीं।
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो कहती हैं, "मैं बागी थी और अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर मैंने काम किया।"
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो अब 44 साल की हैं।
वो एक छोटी कारोबारी हैं। उनकी कहानी से ब्राज़ील में हाल में आए सामाजिक बदलावों का पता चलता है जिनसे लाखों लोगों के जीवन बदल गए हैं, इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। उनका सफर आसान नहीं था।
'अनिश्चित काम'
ब्राज़ील में महिलाओं को अब भी पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है।
ल्यूसिनीड ने सिर्फ़ 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था, वहां से वो रियो दि जनेरो गई और नौकरानी के तौर पर काम किया, ब्राज़ील में ऐसी महिलाओं में ये खासा लोकप्रिय काम है जिन्हें ज़्यादा शिक्षा हासिल नहीं होती।
उनका कहना है कि उन्हें पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ा और उन्हें लगता था कि उन्हें सामान्य वेतन पाने का हक़ नहीं है क्योंकि वो उस शख्स के घर में रहती थीं जिसके लिए काम करती थी।
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ल्यूसिनीड जल्द ही इस अनिश्चित काम से तंग आ गईं। वो रियो दि जनेरो से साओ पाओलो आ गईं और वहां रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ें बेचने लगीं।
तब तक वो कारोबार शुरू करने के अपने सपने को पूरा करने के तरीके सोचने लगी थीं। ये साल 2007 की बात है और तब तक ब्राज़ील में ऐसी चीज़ें खासी लोकप्रिय हो रही थीं जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
ल्यूसिनीड को अवसर मिल गया, उन्होंने ग्रीनपीस के स्थानीय दफ़्तर से ये पूछा कि सुपरमार्केट में मिलने वाले प्लास्टिक कैरीबैग की जगह किस पदार्थ के बैग ठीक रहेंगे।
ल्यूसिनीड बताती हैं, "मुझे बताया गया कि कच्चा सूती कपड़ा ठीक रहेगा, हम यही तो उत्तरी ब्राज़ील में अपने खेत में उगाते थे।"
वो दिन भर सेल्सवूमन के तौर पर काम करने के बाद घर पर ही सूती थैले बनाने लगीं, ये सूती थैले वो छोटी कंपनियों को बेचा करती थीं।
'प्रेरणा'
उनका कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया, आज वो हर महीने करीब 10,000 थैले बना लेती हैं, साओ पाओलो में उनकी फ़ैक्ट्री में उनके पति और बड़े बेटे सहित अभी चार लोग काम करते हैं।
वो कहती हैं कि उनका परिवार उन्हें "कलंक" मानता था अब वो उनके लिए गर्व की बात हैं और पूरे परिवार के लिए आदर्श हैं।
ल्यूसिनीड कहती हैं, "हमारा बड़ा परिवार है। बचपन में हमारे घर में बिजली तक नहीं थी। तब परिवार में ज़्यादा लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, उनकी भविष्य की योजना सिर्फ़ बच्चे पैदा करने तक होती थी। लेकिन मैं उन्हें कहती थी कि शिक्षा महत्वपूर्ण है। अब सभी शहर में रहते हैं और कई तो विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू करने वाले हैं।"
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो की मदद से घर में खाना पकाकर बेचने का उनकी बहन का छोटा सा कारोबार एक पूरे रेस्तरां में बदल गया है।
बदलता समय
ल्यूसीनिड डो नैसीमिएंटो ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था।
ब्राज़ील में ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो जैसी और भी महिलाएं हैं, ब्राज़ील में अमीरों और ग़रीबों के बीच का अंतर कम होता जा रहा है।
उद्यम को बढ़ावा देने वाली संस्था सेब्री के मुताबिक ब्राज़ील में कारोबार चला रही महिलाओं की संख्या पिछले एक दशक में 21% बढ़ी है, ये पुरुषों की संख्या के मुकाबले दो गुना है।
इसके बावजूद ब्राज़ील के श्रम बाज़ार में लैंगिक असमानता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक औसत ब्राज़ीली महिला को अपने पुरुष सहयोगी के मुकाबले 30% कम पैसे मिलते हैं।
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो अगले कुछ सालों में थैलों की बिक्री तीन गुना करना चाहती हैं।
वो कहती हैं, "महिलाओं को अब भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन ये सब बदल रहा है। और ये बदलने का ज़िम्मा हमारा है।"
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जैसा उनके पिता ने सोचा था अगर सब कुछ वैसा ही हुआ होता तो उनकी बहुत कम उम्र में शादी हो जाती और वो पारंपरिक ग्रामीण जीवन जी रही होतीं।
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो कहती हैं, "मैं बागी थी और अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर मैंने काम किया।"
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो अब 44 साल की हैं।
वो एक छोटी कारोबारी हैं। उनकी कहानी से ब्राज़ील में हाल में आए सामाजिक बदलावों का पता चलता है जिनसे लाखों लोगों के जीवन बदल गए हैं, इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। उनका सफर आसान नहीं था।
'अनिश्चित काम'
ब्राज़ील में महिलाओं को अब भी पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है।
ल्यूसिनीड ने सिर्फ़ 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था, वहां से वो रियो दि जनेरो गई और नौकरानी के तौर पर काम किया, ब्राज़ील में ऐसी महिलाओं में ये खासा लोकप्रिय काम है जिन्हें ज़्यादा शिक्षा हासिल नहीं होती।
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उनका कहना है कि उन्हें पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ा और उन्हें लगता था कि उन्हें सामान्य वेतन पाने का हक़ नहीं है क्योंकि वो उस शख्स के घर में रहती थीं जिसके लिए काम करती थी।
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ल्यूसिनीड जल्द ही इस अनिश्चित काम से तंग आ गईं। वो रियो दि जनेरो से साओ पाओलो आ गईं और वहां रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ें बेचने लगीं।
तब तक वो कारोबार शुरू करने के अपने सपने को पूरा करने के तरीके सोचने लगी थीं। ये साल 2007 की बात है और तब तक ब्राज़ील में ऐसी चीज़ें खासी लोकप्रिय हो रही थीं जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
ल्यूसिनीड को अवसर मिल गया, उन्होंने ग्रीनपीस के स्थानीय दफ़्तर से ये पूछा कि सुपरमार्केट में मिलने वाले प्लास्टिक कैरीबैग की जगह किस पदार्थ के बैग ठीक रहेंगे।
ल्यूसिनीड बताती हैं, "मुझे बताया गया कि कच्चा सूती कपड़ा ठीक रहेगा, हम यही तो उत्तरी ब्राज़ील में अपने खेत में उगाते थे।"
वो दिन भर सेल्सवूमन के तौर पर काम करने के बाद घर पर ही सूती थैले बनाने लगीं, ये सूती थैले वो छोटी कंपनियों को बेचा करती थीं।
'प्रेरणा'
उनका कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया, आज वो हर महीने करीब 10,000 थैले बना लेती हैं, साओ पाओलो में उनकी फ़ैक्ट्री में उनके पति और बड़े बेटे सहित अभी चार लोग काम करते हैं।
वो कहती हैं कि उनका परिवार उन्हें "कलंक" मानता था अब वो उनके लिए गर्व की बात हैं और पूरे परिवार के लिए आदर्श हैं।
ल्यूसिनीड कहती हैं, "हमारा बड़ा परिवार है। बचपन में हमारे घर में बिजली तक नहीं थी। तब परिवार में ज़्यादा लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, उनकी भविष्य की योजना सिर्फ़ बच्चे पैदा करने तक होती थी। लेकिन मैं उन्हें कहती थी कि शिक्षा महत्वपूर्ण है। अब सभी शहर में रहते हैं और कई तो विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू करने वाले हैं।"
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो की मदद से घर में खाना पकाकर बेचने का उनकी बहन का छोटा सा कारोबार एक पूरे रेस्तरां में बदल गया है।
बदलता समय
ल्यूसीनिड डो नैसीमिएंटो ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था।
ब्राज़ील में ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो जैसी और भी महिलाएं हैं, ब्राज़ील में अमीरों और ग़रीबों के बीच का अंतर कम होता जा रहा है।
उद्यम को बढ़ावा देने वाली संस्था सेब्री के मुताबिक ब्राज़ील में कारोबार चला रही महिलाओं की संख्या पिछले एक दशक में 21% बढ़ी है, ये पुरुषों की संख्या के मुकाबले दो गुना है।
इसके बावजूद ब्राज़ील के श्रम बाज़ार में लैंगिक असमानता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक औसत ब्राज़ीली महिला को अपने पुरुष सहयोगी के मुकाबले 30% कम पैसे मिलते हैं।
ल्यूसिनीड डो नैसीमिएंटो अगले कुछ सालों में थैलों की बिक्री तीन गुना करना चाहती हैं।
वो कहती हैं, "महिलाओं को अब भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन ये सब बदल रहा है। और ये बदलने का ज़िम्मा हमारा है।"