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चलने से पहले ही रुकी विनिवेश की गाड़ी
शिशिर चौरसिया/नई दिल्ली
Updated Thu, 27 Nov 2014 09:12 AM IST
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शेयर बाजार के नए स्तर पर पहुंचने के बावजूद कुछ सरकारी कंपनियों के शेयरों के दाम अप्रत्याशित रूप से घटने से परेशान सरकार ने विनिवेश कार्यक्रम को कुछ दिन आगे सरका दिया है। इससे पहले योजना थी कि दिसंबर के पहले सप्ताह में विनिवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाए।
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आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक विनिवेश सचिव अराधना जौहरी की मंगलवार शाम वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात के बाद यह निर्णय किया गया। इस बैठक में कोल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी लिमिटेड और एनएचपीसी लिमिटेड के शेयरों के दाम में कमी की बात प्रमुखता से उठी।
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बताया जाता है कि इन कंपनियों के शेयरों के दाम घटने से सरकार की झोली में सात-आठ हजार करोड़ रुपये कम आएंगे। स्थिति को गंभीरता को देखते हुए सरकार ने फिलहाल कुछ दिन और इंतजार करने का मन बनाया है।
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वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक विनिवेश का कार्य देख रहे मर्चेंट बैंकरों से बुधवार को अधिकारियों ने बात की और उनसे इस प्रक्रिया में भाग लेने वाले संभावित निवेशकों की सूची मांगी गई। उनके मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है।
यही नहीं, इस पर भी चर्चा हुई कि कोल इंडिया के 10 फीसदी शेयरों का विनिवेश एक के बजाय दो किस्त में किया जाए। हालांकि इस बात के संकेत वित्त मंत्री की बैठक में ही मिल गए थे क्योंकि उस दौरान कहा गया था कि यदि कोल इंडिया के शेयरों को एक के बजाय दो बार में बेचा जाए तो ज्यादा राशि मिलने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि विनिवेश सचिव के साथ इस मंत्रालय के चार में से तीन संयुक्त सचिव और कुछ अधिकारी रोडशो के सिलसिले में सिंगापुर आदि देशों की यात्रा कर आए हैं।
वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान सरकार ने विनिवेश के जरिए 58,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इनमें से 43,425 करोड़ रुपये कुछ कंपनियों में विनिवेश के जरिए जबकि 15,000 करोड़ रुपये हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और बाल्को में सरकार के बचे हुए शेयरों को बेच कर जुटाए जाएंगे।
मंत्रिमंडल ने 10 सितंबर 2014 को कोल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी लिमिटेड और एनएचपीसी लिमिटेड के विनिवेश का फैसला किया था। उस समय बाजार की कीमतों के आधार पर अनुमान लगाया गया था कि इन्हीं तीन कंपनियों के शेयर बिक्री से सरकार की झोली में करीब 44,000 करोड़ रुपये आ जाएंगे।
लेकिन अभी ओएनजीसी के शेयर की कीमत 8 सितंबर के 454 रुपये के मुकाबले घटकर 385 रुपये पर, कोल इंडिया के 9 सितंबर के 380 रुपये के मुकाबले अभी घटकर 349 रुपये पर और एनएचपीसी के शेयर 10 सितंबर के 22 रुपये के मुकाबले घटकर 20 रुपये पर आ गए हैं। कीमतों में कमी की वजह से सरकार को सात-आठ हजार करोड़ रुपये का घाटा हो जाएगा।
बीते पांच वर्षों के आंकड़ों को देखें तो इस दौरान लगातार विनिवेश का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। पिछले वर्ष तो 40,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले महज 16,027 करोड़ रुपये की जुटाए जा सके थे।