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छोटे कारोबारियों की मुश्किलें होगी आसान
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2013 09:52 PM IST
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छोटे और मझोले कारोबारियों के गिरते कारोबार को संभालने के लिए वित्त मंत्रालय ने अपने स्तर पर कवायद शुरू कर दी है।
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इसके तहत मंत्रालय ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के साथ मिलकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
इसमें कारोबारियों के कारोबार में सुधार के लिए किन कदमों को उठाए जाने की जरूरत है, इस संबंध में मंत्रालय स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ कारोबारियों की भी राय ली गई है।
वित्त मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की कोशिश है कि कैसे निर्यात क्षेत्र में छोटे कारोबारियों की गिरी हिस्सेदारी को बढ़ाया जाए। साथ ही कारोबारियों के लिए कारोबारी राह आसान की जाए। साल 2012-13 में छोटे और मझोले उपक्रमों की निर्यात क्षेत्र में हिस्सेदारी 40 फीसदी से गिरकर 36 फीसदी पर आ गई है।
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निर्यात को बढ़ाने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि हमारी सबसे पहली कोशिश है कि कैसे कारोबारियों के लिए कारोबार करना आसान किया जाएगा।
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इसके तहत तीन प्रमुख मुद्दों पर जोर दिया गया है। पहला यह कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे और मझोले कारोबारियों के उत्पाद प्रतिस्पर्धी बनाया जाय। साथ ही श्रम कानूनों को आसान किया जाए।
कारोबारियों की एक प्रमुख मांग महंगी तकनीकी को सस्ता करने पर है। इस संबंध में सभी मंत्रालयों के साथ मिलकर रोडमैप बनाने की तैयारी है। अधिकारी के अनुसार कार्यशाला के जरिए आने वाले सुझावों को भी उचित तरीके से अमलीजामा पहनाने की कवायद की जाएगी।
देश में इस समय छोटे और मझोले उपक्रमों की कुल संख्या 2.61 करोड़ है। जिनकी निर्यात हिस्सेदारी अब 40 फीसदी से गिरकर 36 फीसदी पर आ गई है। जबकि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में एसएमई कारोबारियों की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा है।