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LPG में रियायत, पेट्रोल सस्ता पर हर माह महंगा होगा डीजल

Fri, 18 Jan 2013 12:47 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 18 Jan 2013 12:47 AM IST
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diesel price to be hiked lpg cap raised petrol cheaper

केंद्र सरकार ने बाजीगरी दिखाते हुए आम आदमी को एक हाथ से राहत पहुंचाई तो दूसरे से छीन भी ली। कहने को तो सरकार ने सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या बढ़ा कर छह से नौ कर दी, लेकिन तेल कंपनियों को डीजल कीमतें तय करने की आजादी देकर महंगाई के दुश्चक्र का एक और द्वार खोल दिया। इसके महंगाई पर दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे।

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फिलहाल तेल कंपनियों ने डीजल के दाम में 45 पैसे प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। हालांकि पेट्रोल के दाम में 25 पैसे प्रति लीटर की मामूली कटौती की गई है। बढ़ी कीमतें बृहस्पतिवार आधी रात से लागू हो गई।
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कैबिनेट के इस फैसले के बाद तेल कंपनियां अब हर महीने 40 से 50 पैसे डीजल मूल्य वृद्धि कर सकती हैं। लेकिन रेलवे और सरकारी परिवहन विभागों जैसे थोक में डीजल खरीदने वालों को अब प्रति लीटर करीब 11 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। वैसे सरकार ने अभी सब्सिडी वाले सिलेंडरों की पुरानी कीमतें यथावत रखी हैं।
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में राजनीतिक मामलों की केबिनेट कमेटी की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने यह घोषणाएं की। मोइली ने कहा, ‘हमने तेल कंपनियों को -समय समय पर- बेहद कम मूल्य वृद्धि की छूट दी है। उन्हें यह वृद्धि इस तरह से करना होगी कि मुद्रास्फीति पर असर न पड़े और सारा बोझ आम आदमी पर न आए।’

जब उनसे पूछा गया कि -कम- से क्या मतलब, तो उन्होंने कहा, ‘कम मतलब कम।’ सरकार के इस फैसले से आदमी को झटका लगा हो लेकिन तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। तेल कंपनियां लंबे समय से डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये के घाटे की बात कहती रही हैं।

भाजपा, सपा और वाम दलों समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकार द्वारा तेल कंपनियों को डीजल मूल्य तय करने के फैसले का विरोध किया है। वहीं छह से नौ की गई नई एलपीजी कैप को राजनीतिक चाल बताया है।

9 सिलेंडर मिलेंगे अब, पहले मिलते थे छह
मोइली ने कहा कि सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर प्रति वर्ष छह से नौ करने का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका मतलब है कि इस साल मार्च तक उपभोक्ताओं को कुल छह सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे। जबकि अप्रैल 2013 से हर साल सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 होगी। जो पहले की गई घोषणा से तीन अधिक है।

जानकारों के अनुसार सरकार के इस फैसले से साफ है कि वह अपने ‘अलोकप्रिय फैसलों’ के खिलाफ जनता की नाराजगी समझ रही है। वह इस साल छह राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले आम चुनाव पर भी अपनी नजरें रखे हुए हैं।

डीजल बाजार के हवालेः इन पर पड़ेगा असर
- रेलवे : रेलवे ने हाल में यात्री किराया बढ़ाया, डीजल मूल्य वृद्धि से इससे रेलवे को मिलने वाला आर्थिक लाभ खत्म होगा। बढ़ कर मिलने वाला पैसा डीजल खरीदने में जाएगा। जरूरी नहीं कि रेलमंत्री अगले बजट में यात्री किराया बढ़ाने के वादे पर अटल रहें।

- मालभाड़ा/परिवहन : रेल-सड़क मार्ग पर माल भाड़े में वृद्धि तय। इससे कच्चे और तैयार माल की कीमतें बढ़ेंगी। रोजमर्रा की परिवहन सेवाएं और स्कूल बसें महंगी होंगी। रेल सूत्रों के मुताबिक बजट में 10 फीसदी माल भाड़ा बढ़ाने की तैयारी है।

- फल-सब्जी-दूध : आम दिन की जरूरत का सामान, सब्जियां-फल और दूध अब गाड़ियों में महंगी दर पर आपके द्वार पहुंचेंगे। अत: महंगे होंगे। नतीजा जेब ढीली होगी।

- खेत-किसान : खेतों में ट्रेक्टर, बोरिंग वेल, थ्रेशर डीजल से चलते हैं। डीजल से होने वाले ढुलाई भाड़े और परिवहन का असर भी खेत-किसान पर पडे़गा। देर सवेर दाल-दाने में मूल्य वृद्धि को तैयार रहिए।

- रीयल एस्टेट : डीजल की कीमतें बढ़ने से पावर सेक्टर से लेकर परिवहन में आने वाली महंगाई रीयल एस्टेट पर भी असर डालेगी। लोहे और सीमेंट के उत्पादन तथा ढुलाई का भार बढ़ेगा। मकान बनाना अब और महंगा समझिए।

ऐसे मोटी होगी सरकार की जेब
सरकार अगर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या बढ़ा कर आपको फायदा देने की बात कर रही है, तो विश्वास कीजिए कि डीजल कीमतों को कंपनियों के हवाले कर अपनी जेब कहीं ज्यादा गर्म कर रही है। जानकारों के अनुसार सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या तीन और बढ़ा देने से सरकारी खजाने पर 2000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

लेकिन सचाई यह है कि डीजल कीमतों में न्यूनतम एक रुपये की बढ़ोतरी भी सरकार की जेब को दस हजार करोड़ रुपये से मालामाल कर देगी। इस प्रकार सिलेंडर सब्सिडी के 2000 करोड़ के नुकसान के बावजूद सरकार आम आदमी की जेब से आठ हजार करोड़ रुपये निकाल लेगी।

हर महीने 1 रुपये या सीधे नौ रुपये?
कंपनियां तेल कीमतों को लेकर केलकर समिति की सिफारिशें मानेंगी या सीधे ही डीजल के दामों में बड़ी वृद्धि करेंगी। अटकलों का बाजार यहां तक गर्म है कि इस समय पेट्रोलियम कंपनियां डीजल पर नौ रुपये प्रति लीटर नुकसान उठा रही हैं, वे सीधे ही कीमतें इतनी बढ़ा सकती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कंपनियां केलकर समिति के एक रुपये हर महीने बढ़ाने के फार्मूले को आदर्श बनाएंगी।

करते रहें इंतजार
सरकार से मिल रही छूट का नतीजा है कि एलपीजी कंपनियां अब सीधे ग्राहकों से कह रही हैं कि उनके पास सब्सिडी वाले सिलेंडर नहीं हैं। जल्दी है तो बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर लीजिए। वर्ना लंबी कतार में इंतजार करें। सूत्रों के अनुसार सरकार की जनविरोधी नीतियों का नतीजा है कि कंपनियां ग्राहकों को राहत देने के बजाय घाटा कम करने की तरफ ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

महानगरों में पेट्रोल-डीजल (रुपये प्रति लीटर)
सिटी    पेट्रोल    डीजल
दिल्ली    67.56    47.15
कलकत्ता    75.03    50.98
मुंबई    74.32    53.14
चेन्नई    70.58    50.13

पेट्रोल के मुकाबले डीजल
जून, 2010 में सरकार के पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के बाद से डीजल की मांग तेजी से बढ़ रही थी। विनियंत्रण के समय डीजल की तुलना में पेट्रोल करीब 26 फीसदी महंगा था। अब डीजल से पेट्रोल करीब 42 फीसदी महंगा है।


बढ़ी डीजल की मांग
वित्तीय वर्ष 2011-12 में देश का डीजल उपभोग करीब 12 फीसदी बढ़ा। बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले 2011-12 में पेट्रोलिय उत्पादों की बिक्री में 4.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई। यह वृद्धि बीते चार वर्षों की तुलना में 2.9 फीसदी की दर से बढ़ी। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल(पीपीएसी) के मुताबिक 2012-2013 में भी डीजल उपभोग में वृद्धि जारी रहेगी।

डीजल की खपत 2012
दिसंबर - 6127
नवंबर -  5807
अक्टूबर -5700
सितंबर - 4938
(खपत- मीट्रिक टन में,डाटा-पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल)

- डीजल की कहां, कितनी खपत
पावर सेक्टर - 8 फीसदी
इंडस्ट्री- 10 फीसदी
पैसेंजर कार- 15 फीसदी
बस-12 फीसदी
ट्रक, ट्रैक्टर, लोडर-37 फीसदी
रेलवे- 6 फीसदी
कृषि- 18.8 फीसदी
अन्य- 12.5 फीसदी
 (डाटा-पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल)

- डीजल पर अंडर रिकवरी
73.81 करोड़ रुपये दिसंबर 2012 तक
9.60 रुपये प्रति लीटर
(डाटा-पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल)

डीजल तब और अब
नवंबर 2012
पेट्रोल - 67.24
डीजल - 47.15
कीमत का अंतर - 20.09 रुपये

जून 2010
पेट्रोल - 47.93  
डीजल - 38.10
कीमत का अंतर - 09.83 रुपये
(दिल्ली में मूल्य सितंबर में हुई मूल्यवृद्धि के बाद)

महंगाई की मार
- 85,586 करोड़ की सब्सिडी दे चुका है केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और कैरोसिन पर चालू वित्त वर्ष के पहले छह माह में।
- 52,711 करोड़ का नुकसान अकेले डीजल पर दी गई सब्सिडी से हुए चालू वित्त वर्ष के पहले छह माह में।
- 6.55 फीसदी थी महंगाई दर जनवरी, 2012 में जो सितंबर माह में डीजल के दाम बढ़ने के साथ साल के अंत में 7.23 फीसदी पर पहुंच गई।
- 6.5 फीसदी था आर्थिक विकास दर वर्ष 2011-12 में जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 5.5 फीसदी और जुलाई-सितंबर तिमाही में यह घटकर 5.3 फीसदी हो गई।

अन्य देशों में डीजल की कीमत
शहर    देश    कीमत
ढ़ाका    बांग्लादेश    49.05
इस्लामाबाद    पाकिस्तान    59.56
काठमांडू    नेपाल    57.91
वाशिंगटन    अमेरिका    54.55
पेरिस    फ्रांस    77.84
बर्लिन    जर्मनी    83.36
रोम    इटली    93.11
लंदन    ब्रिटेन    99.38
(आंकड़े - रुपये/प्रति लीटर में)

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