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खुशखबरी: डीजल हुआ 3.37 रुपए सस्ता

Sun, 19 Oct 2014 12:23 PM IST
Updated Sun, 19 Oct 2014 12:23 PM IST
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diesel price down rupee 3.37 till midnight.

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सरकार ने डीजल मूल्यों के बाजार के हवाले कर दिया। मोदी सरकार के इस फैसले से डीजल शुक्रवार आधी रात से 3.37 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो गया।

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चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घट गई हैं इसलिए नियंत्रण घटने से घरेलू बाजार में भी डीजल के दाम घट गए। शुक्रवार को कैबिनेट ने डीजल कीमतों से सरकार का नियंत्रण खत्म करने का फैसला किया।
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के इस कदम की जानकारी दी। पिछले पांच साल में यह पहली बार है, जब डीजल की कीमत में कटौती की गई है। इससे पहले इसकी कीमत में आखिरी कटौती 29 जनवरी, 2009 को हुई थी।
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उस वक्त दो रुपये प्रति लीटर की कटौती से डीजल की कीमत घट कर 30.86 रुपये हो गई थी। डीजल की कीमत में आखिरी बढ़ोतरी इस साल एक सितंबर को 50 पैसे की हुई थी।

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diesel price down rupee 3.37 till midnight.

दरअसल चालू खाते के बढ़ते घाटे और अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार की वजह से पिछली यूपीए सरकार ने हर महीने डीजल की कीमत 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया था। मोदी सरकार ने यह सिलसिला जारी रखा।

जनवरी, 2013 से सितंबर, 2014 तक डीजल की कीमत 19 बार बढ़ाई जा चुकी थीं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम हो गई और मोदी सरकार को डीजल के दाम बाजार से जोड़ने का मौका मिल गया।

दरअसल डीजल सब्सिडी का मुद्दा राजनीतिक तौर पर संवेदनशील रहा है इसलिए सरकारें इसे खत्म करने का साहस नहीं करती। अब जबकि मोदी सरकार ने डीजल कीमतों को बाजार से जोड़ दिया है तो भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने की वजह से यह उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं बनेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने की वजह से तेल मार्केटिंग कंपनियों का घाटा कम हो गया है और ये मुनाफा कमाने लगी हैं। इस समय तेल बेचने वाली कंपनियों को एक लीटर डीजल पर 3.56 रुपये का फायदा हो रहा है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा था सरकार को फायदा उठाना चाहिए

diesel price down rupee 3.37 till midnight.

भारतीय बास्केट में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत 16 अक्टूबर को 82.83 डॉलर यानि 5092 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई। सरकार के लिए डीजल की कीमतें घटाने का इससे अच्छा मौका और नहीं हो सकता था क्योंकि कीमतें चार साल के न्यूनतम स्तर पर थीं। साथ ही महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव भी खत्म हो चुका था।

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने भी हाल में कहा था कि सरकार को इस स्थिति का फायदा उठाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के पुराने स्तर तक पहुंचने में काफी देर है। दरअसल तेल कीमतों को बाजार से जोड़ने का सिलसिला मनमोहन सिंह सरकार ने शुरू किया था।

इसलिए डीजल हुआ सस्ता

diesel price down rupee 3.37 till midnight.

यूपीए सरकार ने 2010 में पेट्रोल कीमतों को बाजार से जोड़ कर इसकी शुरुआत कर दी थी। वहीं पिछले साल जनवरी को इसने डीजल की कीमतों में हर महीने 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ोतरी का फैसला किया था ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बहुत ज्यादा बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े।

पेट्रोल की कीमतों को बाजार से जोड़ने का नतीजा यह हुआ कि इस साल अगस्त से इसकी कीमत में पांच बार कटौती की गई। ढाई महीने में ही यह सात रुपये लीटर सस्ता हो गया।

इसलिए डीजल हुआ सस्ता

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें चार साल के न्यूनतम स्तर पर
सरकारी तेल कंपनियों का घाटा खत्म, अब कमा रही हैं मुनाफा
सरकारी तेल कंपनियों को एक लीटर डीजल पर 3.56 रुपये का फायदा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की फिलहाल संभावना नहीं

मनमोहन सरकार ने की थी शुरुआत

diesel price down rupee 3.37 till midnight.

सरकार के लिए डीजल की कीमतें घटाने का इससे अच्छा मौका और नहीं हो सकता था क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत चार साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी थीं।

साथ ही महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव भी खत्म हो चुका था। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने भी हाल में कहा था कि सरकार को इस स्थिति का फायदा उठाना चाहिए।

मनमोहन सरकार ने की थी शुरुआत
तेल कीमतों को बाजार से जोड़ने का सिलसिला मनमोहन सिंह सरकार ने किया था। यूपीए सरकार ने 2010 में पेट्रोल कीमतों को बाजार से जोड़ कर इसकी शुरुआत कर दी थी। वहीं पिछले साल जनवरी को इसने डीजल की कीमतों में हर महीने 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ोतरी का फैसला किया था ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बहुत ज्यादा बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े।

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