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डीजल से और भड़केगी महंगाई की आग

Sat, 19 Jan 2013 01:04 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 19 Jan 2013 01:04 AM IST
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diesel and spark fire of inflation
महंगाई की और आग अब डीजल भड़काएगी। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर इसका प्रभाव महंगाई के आगामी आंकड़ों में देखने को मिल सकता है। अर्थशास्त्रियों की राय में सरकार के निर्णय से महंगाई दर एक फीसदी से ज्यादा बढ़ सकती है।
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उनका मानना है कि तेल कंपनियों के डिपो से सीधे बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए दाम में बेतहाशा इजाफा करने से परिवहन, रीयल एस्टेट, रेलवे, रक्षा, कृषि व तमाम उद्योगों की लागत बढ़ेगी। इसका असर आम आदमी की जेब पर होना तय है। मालूम हो कि रेलवे के अनुमान का मुताबिक डीजल के दाम बढ़ने से उनपर 2,700 करोड़ का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

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वरिष्ठ अर्थशास्त्री एसके मंडल का कहना है कि सरकार के निर्णय का शुरुआती असर जनवरी-फरवरी के महंगाई दर के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से नजर आने लगेगा। भले ही दिसंबर में थोक मूल्य आधारित महंगाई दर 7.18 फीसदी थी, लेकिन इसी दौरान खुदरा महंगाई दर दोहरे अंकों में 10.56 फीसदी पर दर्ज की गई थी। अब जबकि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा बना हुआ है तो थोक और खुदरा महंगाई दर में वृद्धि होना तय है।
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उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए रिजर्व बैंक माह अंत में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों में एक चौथाई अंकों की कटौती कर सकता है। एसबीआई की अर्थशास्त्री वृंदा जागीरदार का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से बेशक मुद्रास्फीति दर पर तत्काल असर होगा। लेकिन दीर्घावधि में इसका प्रभाव कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ईंधन के दाम बढ़ाने का निर्णय अभी नहीं लेती तो आगामी वित्त वर्ष में महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा बढ़ सकती थी।

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