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बजट में विकास के दावे ज्यादा, कोशिशें कम
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 28 Feb 2013 11:32 PM IST
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वित्त मंत्री ने 2013-14 के बजट में अर्थव्यवस्था के समावेशी और सतत विकास पर जोर दिया है। अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री ने प्रमुख क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने और निवेश व बचत को प्रोत्साहन देने के उपायों की पुरजोर वकालत की है।
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वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2013-14 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 4.8 फीसदी के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही राजस्व घाटा का अनुमान 3.3 फीसदी लगाया है। उन्होंने कहा कि 2012-13 में राजकोषीय घाटा 5.2 फीसदी रहेगा।
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वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत उच्च विकास दर को हासिल करने में सफल रहेगा। वित्त मंत्री ने 2013-14 के लिए जीडीपी की वृद्धि का अनुमान 6.1-6.7 फीसदी लगाया है। जबकि, उन्होंने चालू वित्त वर्ष में विकास दर के 5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
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उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास दर 2011 की 3.9 फीसदी से घटकर 2012 में 3.2 फीसदी रह गई, जिसका असर हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा अभी भी सरकार के लिए मुख्य चिंता का विषय है। अर्थव्यवस्था में तेजी लाने की दिशा में महंगाई और सरकारी खर्चे भी एक बड़ी बाधा है।
सरकार की कोशिश थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर को 7 फीसदी और मुख्य महंगाई दर को 4.2 फीसदी के दायरे में लाने की है।
वित्त मंत्री ने वित्तीय क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया है। उन्होंने बजट में महिलाओं के लिए सरकारी बैंक की घोषणा के साथ 2014 तक देश के सभी बैंकिंग शाखाओं एटीएम की सुविधा उपलब्ध होने की बात कही है। इसी तरह, वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेसल-3 मानकों को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2013-14 में 14 हजार करोड़ रुपये की पूंजी दी जाएगी।
देश में बीमा का विस्तार बढ़ाने के लिए देश में 10 हजार या उससे ज्यादा की आबादी तक भारतीय जीवन बीमा या फिर सरकारी बीमा कंपनियों का कम से कम एक कार्यालय खोलने की घोषणा की है।