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विदेशी कर्ज के बावजूद सस्ते मकान दूर की कौड़ी

Fri, 18 Jan 2013 09:46 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Fri, 18 Jan 2013 09:46 PM IST
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despite affordable housing farfetched foreign debt
अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए विदेशी कर्ज (ईसीबी) जुटाने की छूट मिलने के बावजूद रीयल एस्टेट डेवलपर्स इसका फायदा उठाने से हिचक रहे हैं। पिछले आम बजट में हुई इस घोषणा को अमल में लाने में ही सरकार को दस महीने लग गए थे। गत 17 दिसंबर को अप्रूवल रूट के जरिए मिली विदेशी कर्ज जुटाने की मंजूरी की शर्तों में रियायत देने के लिए डेवलपर्स ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
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पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड के सीएमडी प्रदीप जैन का कहना है कि अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए विदेशी कर्ज जुटाने की छूट का फिलहाल ज्यादा असर दिखना मुश्किल है क्योंकि इस प्रकार फंड जुटाने में बहुत-सी बाधाएं हैं। अगर सरकार अप्रूवल रूट के बजाय ऑटोमैटिक रूट से ईसीबी की छूट देती तो शायद ज्यादा डेवलपर्स इसका फायदा उठा पाएंगे। फिलहाल ईसीबी के लिए पहले कर्जदाता को तैयार करना पड़ेगा, उसके बाद रिजर्व बैंक और सरकार से मंजूरी लेनी पड़ेगी। इसके अलावा राज्य स्तर पर भी कई अड़चनें हैं।

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रीयल एस्टेट फंडिंग के विशेषज्ञ इंडिया इंडस्ट्रियल ग्रोथ फंड के प्रमुख विपिन अग्रवाल का कहना है कि महानगरों में सस्ते मकानों को बढ़ावा मिलना तभी संभव है जब सरकार बिल्डिंग कानूनों में डेवलपर्स को छूट दे। सिर्फ फाइनेंस से अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा नहीं मिलेगा। रीयल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई के उपाध्यक्ष सी शेखर रेड्डी ने बताया कि ईसीबी की अनुमति देना सरकार का अच्छा कदम है, लेकिन इसे हासिल करने की प्रक्रिया जटिल है।
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राज्य सरकारों की भागीदार वाली अधिकांश अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाएं नाकाम रही हैं। सस्ते मकान बनाकर डेवलपर ज्यादा मुनाफा नहीं कमाता इसलिए सरकार को ऐसी परियोजनाओं में ज्यादा छूट देनी चाहिए। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए ईसीबी के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए नोडल संस्था बनाए गए नेशनल हाउसिंग बैंक के सीएमडी आरवी वर्मा का कहना है कि इस योजना में डेवलपर्स कितनी रुचि ले रहे हैं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। ईसीबी के दिशानिर्देशों को लेकर डेवलपर्स को जो भी दिक्कतें हैं, उन पर विचार किया जा रहा है।

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