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घटती विकास दर ने बढ़ाई राष्ट्रपति की टेंशन
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2013 11:02 PM IST
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सरकार देश की धीमी विकास दर से चिंतित है, लेकिन इससे उबरने के लिए पुरजोर कोशिश भी कर रही है। यह बात संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण में उभरकर सामने आई। साथ ही राष्ट्रपति ने दिल्ली गैंगरेप का अप्रत्यक्ष तौर पर जिक्र कर महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सख्त कानून लाने का ऐलान किया।
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संसद के संयुक्त सत्र में बृहस्पतिवार को अपने पहले अभिभाषण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी की वास्तविक विकास दर 5.4 फीसदी रही, जो बीते दशक के लगभग 8 फीसदी वार्षिक विकास दर से काफी कम है। धीमापन के कारण वैश्विक और घरेलू दोनों हैं।
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साथ ही राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के दिनों में महंगाई दर में कुछ कमी आई है और विकास दर में बढ़ोतरी की आशाएं बंधी हैं। कृषि क्षेत्र में विकास पर प्रसन्नता जताते उन्होंने कहा कि बीते दो साल में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ है।
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11वीं योजना में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की विकास दर 10वीं योजना के 2.4 फीसदी की तुलना में 3.7 फीसदी रही। अर्थव्यवस्था में गति के लिए सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए तो आम निवेशकों के लिए राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना अधिसूचित हुई, बैंकिंग विधेयक पारित हुआ और सरकार ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति अनुमोदित की।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही बृहस्पतिवार को बजट सत्र शुरू हो गया। करीब एक घंटे के अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों का बखान ज्यादा था। इसमें अगले एक साल के लिए सरकार के रोडमैप की खास झलक नहीं दिखी। अभिभाषण में कमोबेश वही बातें दोहराई गईं, जिनका सरकार पहले ही ऐलान कर चुकी है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार अब चुनाव के मूड में आ गई है। इसलिए सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनानी शुरू कर दी हैं। बहरहाल, राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले अभिभाषण में प्रणब दा ने कहा कि सरकार के सामने आज आर्थिक मंदी, रोजगार सुरक्षा और रोजगार के अवसर पैदा करने की प्रमुख चुनौतियां हैं। आज समाज महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से अपेक्षित सेवाएं पाने तक तथा आर्थिक व सामाजिक असमानता को लेकर चिंतित है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं।
दिल्ली गैंगरेप के मद्देनजर प्रणब दा ने कहा कि सरकार महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों की घटनाओं को लेकर चिंतित है। जस्टिस जेएस वर्मा समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल करते हुए अध्यादेश जारी कर दिया गया है और अनेक प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा बिल, भूमि अधिग्रहण बिल, लोकपाल बिल समेत लगभग सभी प्रमुख विधेयकों का जिक्र कर कहा कि सरकार इन्हें पारित कराने के लिए वचनबद्ध है। लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों के बावजूद राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार शासन में पारदर्शिता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जवाबदेही के लिए आवश्यक सुधार करने को प्रतिबद्ध है।
दुग्ध उत्पादन में नंबर वन
राष्ट्रपति के अभिभाषण में वैश्विक मंदी के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था की विकास गति धीमी होने के बावजूद कृषि विकास दर में सुधार की उम्मीद व्यक्त की गई है। 11वीं योजना में कृषि विकास दर 3.7 फीसदी रही, जो दसवी योजना के 2.4 फीसदी के मुकाबले अधिक है।
अभिभाषण में खाद्य सुरक्षा विधेयक पारित कराने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इसके तहत देश की आबादी के एक बड़े हिस्से को सस्ता अनाज पाने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव है। साथ ही राष्ट्रपति ने कहा कि किसानों की कड़ी मेहनत और सरकार की अनुकूल नीतियों के परिणाम स्वरूप देश में लगातार दो वर्षों से अनाज का रिकार्ड उत्पादन हो रहा है। देश में उत्पादन बढ़ने से सरकारी गोदाम अनाज से भरे पड़े हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना कारगर सिद्ध हुई है। इससे देश में गन्ना और कपास की पैदावार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। बागवानी क्षेत्र में भी उत्पादन 25 करोड़ टन के पार हो गया है। दुग्ध उत्पादन में देश दुनिया के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गया है।