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डेबिट-क्रेडिट कार्ड अब होगा पूरी तरह से सेफ
प्रशांत श्रीवास्तव, दिल्ली
Updated Fri, 29 Nov 2013 12:04 PM IST
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देश में प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल में बढ़ती धोखाधड़ी रोकने के लिए अब सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में बैंक और आरबीआई मिलकर रास्ता तलाशने की कवायद कर रहे हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार ग्राहकों की कुल शिकायत में 25 फीसदी शिकायत केवल एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पर आ रही हैं। बढ़ते मामलों के देखते हुए इंडियन बैंक्स एसोएिशन ने इसका रोडमैप भी बनाना शुरू कर दिया है।
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इंडियन बैंक्स एसोसिएशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि बैंकों के पास तेजी से प्लास्टिक मनी के जरिए होने वाले धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं।
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इसके अलावा धोखाधड़ी करने वालों ने भी कई सारे नए तरीके भी ढूंढ लिए हैं। इसे देखते हुए बैंकों में यह बात महसूस की जा रही हैं, कि तकनीकी रुप से फुल प्रूफ प्रावधान किए जाएं। जिससे कि धोखाधड़ी पर लगाम कसी जा सके।
भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2012-13 में करीब 70 हजार शिकायतें बैंकिंग सेवाओं को लेकर बैंकिंग लोकपाल के पास पहुंची हैं। जिसमें से 25 फीसदी से ज्यादा प्लास्टिक मनी को लेकर हैं।
अधिकारी के अनुसार रिजर्व बैंक के जो आंकड़े हैं, वह केवल बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज होने वाले हैं। इसके अलावा भी ढेरों शिकायतें हैं, जो कि बैंकों तक ही सीमित हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए हाल ही में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की समिति ने इस मामले को लेकर बैठक की है। समिति की अध्यक्षता आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर कर रही है।
अधिकारी के अनुसार समिति ने धोखाधड़ी को रोकने के लिए आरबीआई के साथ मिलकर फुल प्रूफ कदम लाने की कवायद शुरू कर दी है। जिसके लिए जल्द ही समिति सिफारिशें भी जारी करेगी।
बैंक धन निकासी की सीमा भी कर सकते हैं फिक्स
इसी तरह ग्राहक की अनुमति से बैंक उसे विकल्प दे सकते हैं, कि वह अपने खाते से कार्ड के जरिए रुपये निकालने की सीमा फिक्स कर दें। यानी ग्राहक भले ही खाते में कितनी राशि रखे पर जितनी सीमा तय कर देगा, उससे ज्यादा का राशि बिना ग्राहक की अनुमति के नहीं निकल सकेगी।
मल्टीपल पिन फार्मेट का आ सकता है विकल्प
डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के जरिए धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकर मल्टीपल पिन फार्मेट को लाने का भी विकल्प तलाश रहे हैं। इस फार्मेट के तहत ग्राहक को दिन, महीने और समय के आधार पर एक निश्चित फार्मेट पर हर बार कार्ड के इस्तेमाल पर अपने पिन को बदलना पड़ता है।
दिसंबर से यदि आप डेबिट कार्ड के जरिए खरीदारी करते हैं, तो आपको उस पर अपने चार अंकों वाला पिन नंबर (पासवर्ड) देना अनिवार्य होगा। आरबीआई के निर्देश देने के बाद बैंकों ने इसे एक दिसंबर से लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस संबंध में बैंकों ने ग्राहकों को सूचना देना भी शुरू कर दिया है। इस कदम के बाद पीओएस मशीन के जरिए की गई खरीदारी से होने वाली धोखाधड़ी में भी कमी आएगी।
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