बैंक खाते, इंटरनेट बैंकिंग साइबर अपराधियों के निशाने पर

सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 23 Jul 2014 04:08 PM IST
Cyber criminals taget bank accounts, internet banking
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साइबर सुरक्षा के बारे में गहन जानकारी और ज्यादा परिष्कृत तकनीक से लैस साइबर अपराधियों के कारण भारत बड़े पैमाने पर साइबर अपराध के खतरे का सामना कर रहा है। हाल के वर्षों में भारत बड़े पैमाने पर साइबर हमले का शिकार रहा है। इससे सवाल उठता है कि आपके सभी बैंकिंग, एटीएम/डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग खाते वास्तव में कितने सुरक्षित हैं।
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ग्लोबल स्तर पर अध्ययन करने वाली रिसर्च फर्म के ताजा सर्वे से पता चलता है कि वित्तीय सेवा क्षेत्र (फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर) में साइबर अपराध का खतरा सबसे अधिक है। इसके अलावा बैकिंग सेक्टर भी साइबर अपराधियों की नजर में है, इसमें निशाना इंटरनेट बैंकिंग और ब्रोकरेज सेवाएं हैं। ऑनलाइन बैंक खातों पर फिशिंग अटैक और एटीएम/डेबिट कार्ड की क्लोनिंग की घटनाएं आम हैं। ऑनलाइन बैंकिंग और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के लिए मोबाइल का उपयोग बढ़ने से साइबर अपराध का खतरा और बढ़ गया है।


भारत में केपीएमजी द्वारा साइबरक्राइम सर्वे 2014 शीर्षक से किए गए एक अध्ययन के मुताबिक संगठनों के लिए साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। पिछले कुछ वर्षों के दौरान साइबर अपराध के हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे संगठन इन खतरों के प्रति सतर्क हुए हैं और वे साइबर अपराध के खतरे से निपटने के तरीकों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर अपराधी अपनी तकनीक को लगातार विकसित और अपग्रेड कर रहे हैं। इसके अलावा अब वे वित्तीय सूचनाओं की चोरी के बजाय कारोबारी जासूसी और सरकारी सूचनाएं हासिल करने की वारदातों को अंजाम देने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

सर्वे के मुताबिक साइबर अपराध के मामले बढ़ने से कारोबारी इसका प्रभाव न सिर्फ वित्तीय मोर्चे पर महसूस कर रहे हैं, बल्कि इससे उनके ब्रांड और साख को भी नुकसान हो रहा है। साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के मद्देनजर कॉरपोरेट साइबर अपराध के खतरे को पहचानना और इससे निपटने की योजना बनाना अहम जरूरत बन गई है।

केपीएमजी इंडिया के पार्टनर एंड हेड ऑफ रिस्क कंसल्टिंग प्रैक्टिस, मृत्युंजय कपूर का कहना है कि केपीएमजी ने प्रबंधन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को तथ्य और साइबर अपराध से निपटने के तमाम पहलुओं के बारे में नीति निर्माताओं को गाइडेंस मुहैया कराने केे लिए साइबर अपराध सर्वे रिपोर्ट जारी की है। साइबरक्राइम सर्वे 2014 में पूरे भारत के लगभग 170 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

सर्वे में शामिल लगभग 89 फीसदी लोगों ने माना कि साइबर अपराध एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। लगभग 51 फीसदी लोगों ने अपने कारोबार की प्रकृति के कारण खुद को साइबर अपराध के लिए आसान निशाना माना। इनमें से 68 फीसदी लोगों ने दावा किया है वे साइबर अपराध के खतरे पर प्रतिदिन नजर रखते हैं। हालांकि सर्वे में शामिल 37 फीसदी लोगों का मानना था कि साइबर हमला ज्यादातर आंतरिक स्रोतों से ही होता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि संगठन गलत इरादा रखने वालों या संवेदनशील जानकारी चाहने वाले पेशेवर घुसपैठिए पर नजर रखें।

सर्वे में ऐसे प्रमुख सेक्टरों का भी उल्लेख किया गया है, जिन पर साइबर हमले का ज्यादा खतरा है। सर्वे में शामिल 58 फीसदी लोगों का मानना है कि फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर साइबर हमले का सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है। वहीं, 11 फीसदी लोगों का मानना है कि कम्युनिकेशंस, एंटरटेनमेंट, और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी साइबर हमले का निशाना बन सकता है।

सर्वे के मुताबिक ज्यादातर साइबर हमलों का मकसद आर्थिक लाभ हासिल करना होता है। इस मुद्दे पर केपीएमजी इंडिया के पार्टनर एंड हेड फोरेंसिक सर्विसेज, संदीप धूपिया का कहना है कि उद्यमी अब उत्पादों की अबाध आपूर्ति के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें लागत कम करने में भी मदद मिली है। हालांकि तकनीक के इस्तेमाल से साइबर अपराध का खतरा पैदा होता है।

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