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प्रतिस्पर्धी सुधारों के लिए कट्स और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मिलाया हाथ

Fri, 21 Nov 2014 06:22 PM IST
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, बैंकाक
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, बैंकाक Updated Fri, 21 Nov 2014 06:22 PM IST
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CUTS and international agencies join hands for project on competition reforms

कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (कट्स) इंटरनेशनल ने विकासशील देशों में सामाजिक और आर्थिक हितों के लिए प्रमुख बाजारों में व्यापक प्रतिस्पर्धी सुधारों पर एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया है।

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प्रतिस्पर्धी सुधारों को केंद्र में रखने और नीति निर्माताओं के ध्यान में इसे लाने के लिए कट्स ने भारत, घाना, लीपींस और जांबिया में इस प्रोजेक्ट को एक क्रू प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया है। संस्था का कहना है कि प्रतिस्पर्धी सुधारों का उपभोक्ता और उत्पादकों पर सकारात्मक असर होगा।
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कट्स इंटरनेशनल के महासचिव प्रदीप एस. मेहता के मुताबिक क्रू प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य एक ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना है, जो दो चुनिंदा बाजारों में उपभोक्ताओं और उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धी सुधारों का आकलन करने में मदद करेगा। मेहता का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी सुधारों के फायदे को दिखाना है ताकि इस मसले पर अधिक से अधिक ध्यान आकृष्ट करने के साथ-साथ सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के समूह वाली एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति के मार्गदर्शन में कट्स की तरफ से इस पहल को प्रभावी बनाया जाएगा। कट्स अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट के मात्रात्मक और विश्लेषणात्मक विषय वस्तु पर मौजूदा साहित्य व दृष्टिकोण की समीक्षा करेगा।

एक दर्जन से अधिक देशों के प्रतिनिधि और विश्व बैंक, यूएन ईएससीएपी एवं ओईसीडी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस कांफ्रेंस में शिरकत कर रहे हैं। चार प्रोजेक्ट देशों में कट्स और इसके सहभागी प्रत्येक देश में नेशनल एडवोकेसी प्लान बनाने के लिए मौजूदा साक्ष्यों का उपयोग करेंगे। इसका उद्देश्य विकृतियों को दूर कर प्रतियोगी नीतियों और कार्यों की सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे कि इसका लाभ सामान्य उपभोक्ता और इन देशों में छोटे उद्यमियों को मिल सके।


कांफ्रेंस के दौरान मेहता ने कहा कि अनुसंधानकर्ताओं/प्रेक्टिशनर्स में इस बात की आम सहमति है कि प्रतिस्पर्धी सुधारों के जरिए गुणवत्ता परक वस्तुओं और सामानों का उत्पादन कर इन्हें कम कीमतों पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराकर उपभोक्ता कल्याण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

प्रतियोगी सुधार इंडस्ट्री के अनुरूप भी है, क्योंकि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है। कुछ अध्ययनों में प्रतियोगी सुधारों के सकारात्मक असर की बात सामने आई है। हालांकि, विकसित देशों में इस तरह के प्रमाण बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं, जोकि प्राय: प्रतिस्पर्धी नीतियों के एजेंडा को आगे बढ़ाने में अड़चनें पैदा करते हैं।


उन्होंने बताया कि क्रू प्रोजेक्ट की पहल को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। कट्स दो प्रतिष्ठित विद्वानों/प्रेक्टिशनर्स के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट का लागू करेगा।

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