ग्राहकों को मिलेगी राहत, जल्द सस्ते होंगे इन कंपनियों के कर्ज!
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सौ करोड़ या उससे ज्यादा का कारोबार करने वाली माइक्रोफाइनेंस कंपनियां 1 अप्रैल से अपने ब्याज मार्जिन को अधिकतम 10 फीसदी के दायरे में ही रख सकेंगी। फिलहाल मार्जिन की यह सीमा 12 फीसदी है।
ऐसे में बैंकों से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर और अधिकतम सीमा को देखते हुए नए साल में बड़ी माइक्रोफाइनेंस कंपिनयों की तरफ से ब्याज दरों में कमी की जा सकती है।
इसके अलावा छोटी कंपनियों को यह फायदा मिलेगा कि वह ऊंची ब्याज दरों के बावजूद प्राथमिकता क्षेत्र का लाभ ले सकेंगी। आरबीआई के निर्देश पर इक्रा की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 लागू होने से देश में काम कर रही करीब 90 फीसदी माइक्रोफाइनेंस कंपनियां, जिन पर 10 फीसदी ब्याज मार्जिन की सीमा आरबीआई ने तय की है, उनके लाभ पर ज्यादा असर नहीं होगा।
छोटी कंपनियों के साथ ग्राहकों को मिलेगा लाभ
इक्रा के मुताबिक 90 फीसदी कंपनियां 4.5-15 फीसदी ऑपरेटिंग खर्च पर काम कर रही है। ऐसे में 10 फीसदी कैप करने का ज्यादा असर नहीं होगा। ऐसे में नए निर्देश से, जो कंपनियां कम ऑपरेटिंग खर्च पर काम कर रही हैं उन्हें बेहतर लाभ मिलेगा। इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक नए नियम से छोटी कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलने की राह आसान होगी।
इसका फायदा कंपनियों के साथ-साथ उनके ग्राहकों को भी मिलेगा। नए प्रावधान के तहत कंपनियां ऊंची ब्याज दर के बावजूद प्राथमिकता क्षेत्र का लाभ ले सकेंगी। अभी छोटी कंपनियों के लिए भी रिजर्व बैंक ने अधिकतम 26 फीसदी ब्याज दर रखने की सीमा लगा रखी है।
साथ ही नए नियमों में 100 करोड़ रुपये से कम का पोर्टफोलिओ रखने वाली कंपनियों के लिए ब्याज मार्जिन की सीमा 12 फीसदी तय की गई है। रिपोर्ट के अनुसार माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को नए नियमों के लागू होने के बाद अगले तीन साल 40-50 फीसदी विकास दर बनाए रखने के लिए करीब 40-55 अरब पूंजी की जरूरत होगी।