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'चालू खाते का घाटा 2.5 फीसदी पर लाना होगा'
चेन्नई/एजेंसी
Updated Thu, 29 Nov 2012 09:34 PM IST
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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष सी रंगराजन ने लंबे समय से 4.5 फीसदी से ऊपर चल रहे चालू खाते के घाटे को कम करके 2.5 फीसदी के स्तर पर लाने की जरूरत जताई है। हालांकि उन्होंने चालू वित्त वर्ष के लिए चालू खाते का घाटा 3.5 फीसदी रहने की बात कही।
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रंगराजन ने कहा कि चालू खाते का घाटा ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और हमें इसे नीचे लाने के प्रयास करने होंगे। हमें इसे 4.5 फीसदी के मौजूदा स्तर से घटा कर 2.5 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखना चाहिए, पर इस साल यह संभवत: जीडीपी के 3.5 फीसदी के स्तर पर रहेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के मोर्चे पर देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को विकास के रास्ते पर लौटाने के लिए चालू खाते के घाटे को घटाना एक कारगर उपाय हो सकता है।
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हालांकि उन्होंने घाटे को घटाने का कोई उपाय नहीं सुझाया। चालू खाते के घाटे को नीचे लाने के अलावा उन्होंने विकास दर में तेजी लाने के लिए महंगाई पर लगाम लगाने और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण की भी जरूरत जताई। रंगराजन ने कहा कि पिछले करीब तीन साल से महंगाई दर लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिसे नीचे लाने की जरूरत है। वित्तीय ढांचे को मजबूत करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए अगले पांच साल में हमें राजकोषीय घाटे को तीन फीसदी के दायरे में लाना होगा।
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वित्त मंत्री पी चिदंबरम वित्तीय सुदृढ़ता का रोडमैप पेश कर चुके हैं और हमें उस ओर बढ़ते जाना होगा। मल्टी ब्रांड रिटेल को लंबे समय के परिप्रेक्ष्य में देश के लिए बेहतर बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एफडीआई की मंजूरी का निर्णय ले चुकी है और इस पर आम सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोकतंत्र में मतभेद तो होते ही हैं, पर इन्हें सहमति में बदलना ही एक आदर्श स्थिति होती है।