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चिदंबरम की कोशिशों पर भारी पड़ा घाटा

Mon, 30 Sep 2013 08:01 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 30 Sep 2013 08:01 PM IST
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current account deficit hike

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अभी चालू खाते के घाटे पर अंकुश नहीं लग पाया है।

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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2013) में यह घाटा बढ़कर 21.8 अरब डॉलर यानी जीडीपी के 4.9 फीसदी तक पहुंच गया है। पिछले साल इस अवधि में यह 16.9 अरब डॉलर था।

पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़ने और निर्यात में कम होने की वजह चालू खाते के घाटे में इतनी इजाफा हुआ है।

जून तिमाही में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स 34.6 करोड़ डॉलर के घाटे के स्तर परपहुंच गया है, जबकि मार्च के आखिर में यह 2.68 अरब डॉलर का सरप्लस था।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इस साल चालू खाते के घाटे को 3.7 फीसदी पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है।

रिजर्व बैंक की ओर से जारी बैलेंस ऑफ पेमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार घाटा बढ़ने और सेवाओं व आमदनी में धीमी प्रगति की वजह से वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में चालू खाता घाटा बढ़कर 21.8 अरब डॉलर तक पहुंचा है।
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गत वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में सरकारी खर्चों में कटौती कर सरकार इसे 3.6 फीसदी तक सीमित रखने में कामयाब रही थी। फिर भी वर्ष 2012-13 में चालू खाते का घाटा 88 अरब डॉलर यानी जीडीपी के 4.8 फीसदी तक चला गया था।
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गौरतलब है कि पहली तिमाही के दौरान निर्यात में करीब 1.5 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि आयात 4.7 फीसदी बढ़ा था।

इससे 50 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार घाटा हुआ था। इसी का असर चालू खाते के घाटे पर दिख रहा है।

जानकारों का मानना है कि जून के बाद चालू खाते के घाटे में कमी आने की उम्मीद है।

सोने के आयात पर लगी पाबंदियों से इसका आयात बहुत कम हुआ है, जबकि विदेशी बाजारों की मांग सुधरने से निर्यात बढ़ रहा है। इसका असर अगली तिमाही के नतीजों पर दिखाई देगा।


अर्थशास्त्री डीएच पाई पुलेंदीकर का कहना है कि पहली तिमाही के चालू खाते के घाटे के आंकड़े से अगर सोने के आयात को हटा दें, तो यह सवा तीन फीसदी के आसपास बैठता है।

पिछले कुछ महीनों में सरकार ने सोने, चांदी, प्लेटिनम के साथ-साथ कई गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाया है। इसका असर जल्द दिखाई देगा।

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