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तब घट जाएगी देश की जीडीपी ग्रोथ!

Sat, 01 Feb 2014 12:43 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 01 Feb 2014 12:43 PM IST
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country gdp growth rate is low

केंद्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष (2012-13) के लिए जीडीपी के आंकड़ों में महत्वपूर्ण फेरबदल किया है। इस अवधि के लिए जीडीपी की विकास दर को पांच फीसदी के पुराने अनुमान से घटाकर 4.5 फीसदी कर दिया गया है।

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हालांकि इसके लिए 2011-12 के जीडीपी अनुमान में बढ़ोतरी को आधार बनाया गया है। लेकिन इस बदलाव का फायदा सरकार को चालू वित्त वर्ष के जीडीपी अनुमान में कुछ सुधार के रूप में मिल सकता है।
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चालू साल में पांच फीसदी की विकास दर के सरकार के सारे दावे हवा होते जा रहे हैं और जिस तरह से औद्योगिक उत्पादन और सेवा क्षेत्र के कमजोर आंकड़े आ रहे हैं उसके चलते चालू साल में जीडीपी की विकास दर पांच फीसदी से कम रहना तय माना जा रहा है।
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ऐसे में सरकार को आंकड़ों की इस बाजीगरी से कुछ फायदा मिल सकता है क्योंकि चालू साल के आकलन के लिए पिछले साल का कमजोर आधार कुछ मदद करेगा। सीएसओ द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह संशोधित अनुमान दिये गये है। फरवरी के पहले सप्ताह में चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के आरंभिक अनुमान भी जारी होने की संभावना है।

विकास दर में इस कमी के पीछे कृषि क्षेत्र, खनन क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र में धीमी ग्रोथ को प्रमुख वजह बताया गया। हालांकि, वर्ष 2011-12 में हुई जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.2 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी किया गया है। लेकिन पिछले साल की धीमी वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी से ऊपर की विकास दर के दावे कमजोर होने लगे हैं।

सीएसओ के अनुसार साल 2004-05 के मूल्य के आधार पर सकल घरेलू उत्पाद की फैक्टर कॉस्ट 54.8 लाख करोड़ थी। जो कि 2011-12 में 52.5 लाख करोड़ रुपये रही थी। सीएसओ ने इसके अलावा साल 2011-12 के दूसरे संशोधित अनुमान और साल 2010-11 के तीसरे संशोधित अनुमान भी जारी किए हैं। जिसके तहत साल 2010-11 में विकास 9.3 फीसदी की जगह 8.9 फीसदी रही थी।

क्यों आई विकास दर में गिरावट?
सीएसओ के अनुसार साल 2012-13 में कृषि, मछलीपालन, खनन आदि में ग्रोथ पहले के 1.6 फीसदी की जगह 1.0 फीसदी रही है। इसी तरह विनिर्माण क्षेत्र, बिजली और गैस क्षेत्र में ग्रोथ 2.3 फीसदी की जगह केवल 1.2 फीसदी रही थी । जिसका असर ग्रोथ कम होने के रूप में हुआ है।

कोर सेक्टर की रफ्तार धीमी
देश के बुनियादी उद्योगों का उत्पादन फिर सुस्ती की राह पर है। गत दिसंबर के दौरान आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में सिर्फ 2.1 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस धीमी वृद्धि के पीछे कोयला, पेट्रोलियम रिफाइनरी, इस्पात और सीमेंट क्षेत्रों की फीका प्रदर्शन प्रमुख वजह रहा है।

करीब एक साल पहले दिसंबर, 2012 में इन उद्योगों में 7.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। यह आठ आधारभूत उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में करीब 38 फीसदी महत्व रखते हैं। इस तरह ये आंकड़े देश के कुल औद्योगिक उत्पादन की मुश्किलों की ओर इशारा कर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-दिसंबर के दौरान भी बुनियादी उद्योगों का प्रदर्शन फीका रहा है। इस दौरान इनके उत्पादन में सिर्फ 2.5 फीसदी का इजाफा हुआ। जबकि गत वर्ष समान अवधि में करीब 6.8 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी। गत दिसंबर में कोयला का उत्पादन में 0.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि प्राकृतिक गैस का उत्पादन 9.9 फीसदी गिरा है। रिफाइनरी उत्पादन में भी 1.7 फीसदी की कमी आई है।


इस दौरान सबसे ज्यादा 6.7 फीसदी वृद्धि बिजली उत्पादन में हुई है। उर्वरक उत्पादन 4.1 फीसदी और स्टील उत्पादन में 3.1 फीसदी बढ़ा है।

लगातार तीसरे महीने धीमी वृद्धि
गत सितंबर में बुनियादी उद्योगों के उत्पादन 8 फीसदी बढ़ा था। लेकिन इसके बाद इन क्षेत्रों में धीमी वृद्धि का सिलसिला शुरू गया। गत नवंबर में भी बुनियादी उद्योगों को उत्पादन सिर्फ 1.7 फीसदी बढ़ा था, जबकि अक्तूबर में 0.6 फीसदी की गिरावट आई थी। अगर वित्त वर्ष के बाकी 3 महीनों में भी यही सिलसिला जारी रहा, तो इस साल बुनियादी उद्योगों की रफ्तार 6 वर्ष के न्यूनतम स्तर पर आ सकती है।

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