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मेक इन इंडिया के लिए कॉरपोरेट मांगे बड़े सुधार

Fri, 26 Sep 2014 08:46 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला ब्यूरो दिल्ली
ब्यूरो /अमर उजाला ब्यूरो दिल्ली Updated Fri, 26 Sep 2014 08:46 AM IST
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corporate wants big bang reforms for make in india

सरकार को इसको लिए बड़े सुधार करने होंगे। जिससे कि उनमें यह भरोसा जग सके, कि न केवल वह भारत में आसानी से कारोबार कर सकेंगी, बल्कि उनके लिए भविष्य में किसी तरह की अड़चनें नहीं आएंगी। कॉरपोरेट जगत भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए मोदी सरकार से पारदर्शी नीति, श्रम सुधार, जीएसटी में अमल , सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसे अहम कदमों की मांग कर रहा है।

जीएसटी,श्रम सुधार,सिंडल विंडो क्लीयरेंस और लाल फीताशाही खत्म करने की है मांग

बृहस्पतिवार को मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शिरकत करने आए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद माहौल में आत्मविश्वास बढ़ा है। जरुरी है कि सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को लागू करें। जीएसटी लागू होने से भारत एक बाजार के रुप में काम करेगा। बोस इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक फ्रैंज हाबर ने भी इस मौके पर सरकार से कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान करने की बात कही है। उनके अनुसार सरकार को सिंगल विंडो क्लीयरेंस और श्रम सुधारों पर जोर देने की जरूरत है। जिससे कि तेजी से निवेश हो सके। भारत में निवेश को लेकर पिछले दो से तीन साल में बने नकारात्मक माहौल को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के दौरान कई बार निवेशकों को यह अहसास दिलाने की कोशिश की , उनकी सरकार उनके लिए है। साथ ही वह उन पर भरोसा करते हैं। भारत में हाल ही में विदेशी कंपनियों को  टैक्स के मामले का सामना करना पड़ा हैं। जिसमें वोडाफोन, नोकिआ जैसे कंपनियां शामिल हैं। इसे देखते हुए कॉरपोरेट मोदी सरकार से पारदर्शी, भरोसेमंद माहौल और लाल फीताशाही में कमी की मांग कर रहे हैं। 

कार्यक्रम के दौरान आईसीआईसी बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर ने कहा कि सरकार को तीन प्रमुख मुद्दों को जल्द हल करना चाहिए। जिसमें कौशल विकास, सेक्टर आधारित नीति और कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान करना शामिल है। यदि ऐसा होता है, तो भारत में तेजी से निवेश बढ़ेगा।

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