खादी स्टोर नहीं बन पाए निजी कंपनियों की पसंद
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कॉरपोरेट की रूचि न होने से अब सरकार नए सिरे से खादी स्टोर को विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके पहले साल 2010 में एशियाई विकास बैंक के तहत 15 करोड़ डॉलर का कर्ज खादी रिफार्म पैकेज के रूप में भारत सरकार को देने का समझौता हुआ था। पैकेज के तहत देश भर के प्रमुख खादी स्टोर को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी-भागीदारी) मॉडल के तहत विकसित करना था।
पीपीपी मॉडल कंपनियों को नहीं आया रास सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कई बार टेंडर निकालने के बाद भी अंतिम चरण के लिए निजी कंपनियों ने रूचि नहीं दिखाई। ऐसे में अब मंत्रालय नए सिरे से पूरे मॉडल को विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
अब नए सिरे से बनेगा रोडमैप खादी रिफार्म के तहत शुरू में पीपीपी मॉडल के तहत 20 खादी आउटलेट को निजी कंपनियों को सौंपा जाना था। पर निजी कंपनियों के की रुचि को ने देखते हुए 20 की जगह 5-6 खादी स्टोर को ही निजी कंपनियों को सौंपने की तैैयारी हुई थी। जिसके लिए भी कंपनियों ने नहीं रूचि दिखाई। दिल्ली और मुंबई स्थित भवन को केवल सरकार के अधीन रखा गया है। अब पूरी कवायद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय नए सिरे से करेगा।
इसके लिए खादी स्टोर के प्रबंधन का काम सरकार खुद रखकर, उत्पादों की मार्केटिंग का काम निजी कंपनियों को दे सकती है। इसके अलावा निजी कंपनियों को स्टोर 10-15 साल की अवधि के लिए लीज पर देने का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। अधिकारी के अनुसार अब नए मॉडल के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट नोट बनाने की तैयारी है।