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गार दो साल टला, निवेशकों को राहत
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jan 2013 10:56 PM IST
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केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश में कर चोरी पर बने विवादित जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल्स (गार) को लागू करने का फैसला अप्रैल 2016 तक टाल दिया है। इस मुद्दे पर बनी पार्थसारथी सोम समिति की प्रमुख सिफारिशों को मानते हुए निवेशकों को कड़े प्रावधानों से राहत दी गई है।
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के तहत आने वाले अप्रवासी निवेशकों को गार से मुक्त रखा है। विभिन्न देशों के साथ भारत की कर संधियों का फायदा न उठाने वाले विदेशी फंड पर गार लागू नहीं होगा। गार को टालने की घोषणा के साथ बांबे स्टॉक एक्सचेंज करीब 200 अंक उछलते हुए 19,864 तक जा पहुंचा।
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वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने सोमवार को गार पर लिए कई अहम फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने गार संबंधी आयकर कानून के चैप्टर 10 ए के प्रावधानों को 1 अप्रैल 2014 के बजाय अप्रैल 2016 से लागू करने का फैसला किया है। सरकार ने कुछ फेरबदल के साथ सोम समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। वित्त मंत्री ने भरोसा जताया है कि अब गार को लेकर सभी शंकाएं दूर हो जानी चाहिए।
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गार के प्रावधानों में किए गए संशोधन उचित और भेदभाव रहित हैं, जिनमें निवेशक और राजस्व हितों के बीच संतुलन रखा गया है। गार के दायरे को सीमित रखते हुए सरकार ने अब सिर्फ ऐसे मामलों में इन नियमों को लागू करने का फैसला किया है, जिनमें कर छूट का फायदा उठाना ही मुख्य उद्देश्य है। जो निवेश 30 अगस्त 2010 से पहले किए गए हैं, उन्हें भी गार से मुक्त रखा गया है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि एफआईआई के तहत आने वाले अप्रवासी निवेशकों पर गार लागू नहीं होगा। ऐसे एफआईआई जो आयकर की धारा 90 और 90 ए के तहत समझौते का फायदा नहीं उठा रहे हैं, वह भी गार के दायरे में नहीं आएंगे।
उन्होंने कहा है कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि एक करदाता की एक आमदनी पर दो बार टैक्स न लगे। गार पर सरकार के फैसले से विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। पिछले साल के बजट में पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मॉरिशस जैसे टैक्स-हैवन से निवेश के जरिये कर चोरी के मामलों को रोकने के लिए गार को लागू करने का ऐलान किया था, लेकिन विदेशी निवेशकों के विरोध को देखते हुए इसे अप्रैल, 2016 तक टाल दिया गया।