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जरूरी वस्तुओं के वायदा कारोबार पर शिकंजा

Fri, 20 Jun 2014 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Updated Fri, 20 Jun 2014 01:18 AM IST
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control on future trading of essential commodities.

महंगाई का मुकाबला करने में चौतरफा जुटी केंद्र सरकार जरूरी वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक लगा सकती है। पिछले दिनों आलू की बढ़ती कीमतों को देखते हुए वायदा बाजार नियामक फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) ने जुलाई के बाद आलू नए सौदों पर रोक लगा दी। वायदा कारोबार को नियंत्रित रखने के लिए खरीदारों से ली जाने वाली जमा राशि भी बढ़ाई गई है। सरकार के इस कदम से आवश्यक वस्तुओं में वायदा कारोबार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने की अटकलों को बल मिला है।

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अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग खाने-पीने की चीजों की महंगाई के लिए जमाखोरी और कृषि जिंसों के वायदा कारोबार को दोषी ठहराता है। खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली भी हाल में बढ़ी महंगाई के लिए कमजोर मानसून की आशंका के बीच बढ़ती जमाखोरी पर निशाना साधा चुके हैं। आलू का अधिकांश वायदा कारोबार एमसीएक्स पर ही होता है। एनसीडीईएक्स पर आलू के सौदों की संख्या बहुत कम है। फिर भी वायदा बाजार नियामक ने आलू की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी को देखते हुए जुलाई से आगे के सौदों पर रोक लगाने का फैसला किया है।
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एफएमसी के निर्देश के बाद प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स ने 18 जून के बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर के सौदों पर रोक लगा दी है। खरीदारों को नियंत्रित करने के लिए एमसीएक्स ने मार्जिन राशि भी 5 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करने का फैसला किया है। आगामी 23 जून से आलू के सभी वायदा सौदों पर 25 फीसदी का विशेष मार्जिन लागू होगा।
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