फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   company law could not punish companies for full spending on csr

एक ऐसा कानून जिसमें नहीं होगी सजा

Sun, 13 Apr 2014 08:35 AM IST
Updated Sun, 13 Apr 2014 08:35 AM IST
विज्ञापन
company law could not punish companies for full spending on csr

भले ही नए कंपनी कानून के तहत कंपनियों के लिए अपने लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन यदि कोई कंपनी लक्ष्य को पूरा नहीं करती है, तो उस पर किसी तरह की पेनाल्टी या जुर्माना लगाया जाएगा, इसका प्रावधान कंपनी कानून में नहीं किया गया है।

विज्ञापन


ऐसे में सरकार भले ही दावा कर रही है कि चालू वित्त वर्ष में कॉरपोरेट सोशनल रिस्पॉनसबिलटी (सीएसआर) के जरिए कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करेंगी, लेकिन वह पूरा होना आसान नहीं नजर आ रहा है। खास तौर पर जब अनिवार्यता पूरी न करने पर कंपनियों को किसी तरह की पेनाल्टी या जुर्माना लगने का डर नही होगा।

विज्ञापन

बताओ लक्ष्य क्यों नहीं किया पूरा?

company law could not punish companies for full spending on csr

कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अंतिम नियम बनाने में पेनाल्टी का प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि ड्रॉफ्ट नियम तय करते वक्त इस बात पर चर्चा की गई थी , कि कंपनियों से लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह के प्रवाधान किए जाए।

सीएसआर नियम में केवल इस बात के प्रावधान किए गए हैं, कि जो कंपनी पिछले तीन साल में 2 फीसदी का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी, उसे केवल अपनी बोर्ड रिपोर्ट में इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही सीएसआर समिति को ठोस वजह बनानी होगी, कि वह लक्ष्य क्यों नहीं पूरा कर पाई।

1 अप्रैल से लागू हुआ नियम

company law could not punish companies for full spending on csr

एक अप्रैल से लागू सीएसआर कानून के तहत ऐसी कंपनियां जिनका टर्नओवर सालाना एक हजार करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है। इसके अलावा कंपनी का नेटवर्थ कम से कम 500 करोड़ रुपये या फिर उनका शुद्ध लाभ पांच करोड़ रुपये और उससे ज्यादा है।

उन्हें सीएसआर के नियम लागू करने होंगे। जिसके तहत कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना होगा। जो कि पिछले तीन साल की कमाई के औसत पर तय होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed