डीजल कीमतों में बड़े फेरबदल नहीं कर सकेंगी कंपनियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेल कंपनियों को सरकार ने डीजल मूल्य तय करने के अधिकार तो दिए हैं, लेकिन इसकी सीमा तय कर दी है। ऐसे में कंपनियां डीजल मूल्य में बड़े फेरबदल नहीं कर सकेंगी। इसके बावजूद जानकार मान रहे हैं कि प्रति माह 50 पैसे तक की वृद्धि भी आगामी महीनों में महंगाई को भड़काने में बड़ा योगदान देगी। डीजल कीमतों में नियमित मूल्य वृद्धि का महंगाई पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि केलकर समिति ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें हर महीने एक रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार लगातार ‘अलोकप्रिय फैसले’ ले रही सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए छोटे-छोटे कदम उस दिशा में बढ़ा रही है।
सरकार के डीजल निर्णय का तेल कंपनियों ने स्वागत किया है। मालूम हो कि तेल कंपनियों ने बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बिक्री से मौजूदा वित्त वर्ष में 1,60,000 करोड़ रुपए अंडर रिकवरी का अनुमान लगाया था। वैसे सूत्र बताते हैं कि ईंधन सब्सिडी के बढ़ते बोझ के कारण वित्त मंत्रालय एलपीजी कैपिंग सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं था। इसलिए अंडर रिकवरी की भरपाई के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीजल को आंशिक रूप से नियंत्रण मुक्त कर दिया है। ताकि सरकारी तेल कंपनियां किस्तों में कीमतों को बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हो सके।
वहीं एलपीजी कैप के मामले में पेट्रोलियम सचिव जीसी चतुर्वेदी ने बताया कि निर्णय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में ग्राहक तीन की जगह पांच सब्सिडी प्राप्त सिलेंडर प्राप्त कर सकेंगे। नौ रियायती सिलेंडर की कैपिंग अगले वित्त वर्ष से लागू होगी। उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में सरकार ने प्रत्येक परिवार को सालाना केवल छह रियायती सिलेंडर और मौजूदा वित्त वर्ष में तीन सिलेंडर देने का ऐलान किया था। मंत्रालय का अनुमान है कि एलपीजी कैपिंग की सीमा नौ सिलेंडर होने के कारण सालाना 9,600 करोड़ रुपए अतिरिक्त अंडर रिकवरी का बोझ बढ़ेगा। जबकि चालू वित्त वर्ष में तीन की जगह पांच रियायती एलपीजी उपलब्ध कराने पर 6,200 करोड़ रुपए अतिरिक्त अंडररिकवरी का अनुमान है।
यूं बढ़ेगी महंगाई
वरिष्ठ अर्थशास्त्री और एनर्जी विशेषज्ञ एसके मंडल के मुताबिक तेल कंपनियां अगर डीजल के दाम बढ़ाती है तो इसका असर उद्योग और आम आदमी दोनों पर होगा। ओर औद्योगिक उत्पादन, कच्चे माल की लागत और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, वहीं आम आदमी का परिवहन लागत, स्कूल बस का किराया,बिजली बिल, कृषि लागत व फल, सब्जियों के दाम भी बढ़ जाएंगे। डीजल की तात्कालिक मूल्य वृद्धि से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दर इसका प्रभाव 0.23 फीसदी होगा। इजाफे की वजह से औद्योगिक उत्पादों की कीमत 0.4 फीसदी, परिवहन लागत 0.5 फीसदी और कृषि उत्पाद 0.11 फीसदी महंगा होने की संभावना है।