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भ्रष्टाचार विरोधी नियमों को ठीक से नहीं जानतीं कंपनियां
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2014 09:02 AM IST
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भ्रष्टाचार के मसले पर यह चौंकाने वाली बात है कि देश में काम कर रही कंपनियां मौजूदा भ्रष्टाचार विरोधी नियमों से पर्याप्त रूप से अवगत नहीं हैं। यह तथ्य गंभीर इसलिए भी है क्योंकि कंपनियां भ्रष्टाचार को कारोबार की राह में खुद एक बड़ी बाधा मानती हैं। यह खुलासा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से अलायंस फॉर इंटेग्रिटी द्वारा जारी एक सर्वे में हुआ है।
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भारत में काम रही कंपनियों के 75 वरिष्ठ प्रबंधकों ने इस सवाल पर काफी हद तक अप्रत्याशित जवाब दिया कि वे भ्रष्टाचार के मुद्दे से कैसे निबटेंगे। ‘भारत में भ्रष्टाचार’ विषय पर हुए सर्वे का एक अहम निष्कर्ष यह है कि भारत में वरिष्ठ प्रबंधक मानते हैं कि भारत में काम कर रही कंपनियों को भ्रष्टाचार नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
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सर्वे में शामिल 80 फीसदी प्रबंधकों का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्यक्रमों के अभाव में कंपनियों के लिए आर्थिक नुकसान होने का खतरा होगा। अन्य 69 फीसदी प्रबंधक भी इससे सहमत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में काम करी रही कंपनियां मौजूदा भ्रष्टाचार विरोधी नियमों से पर्याप्त रूप से अवगत नहीं हैं।
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अलायंस फॉर इंटेग्रिटी के लिए जवाबदेह जीआईजेड में परियोजना प्रबंधक नूर नक्शबंदी कहते हैं कि हम खुद इस सर्वे के इस विशेष निष्कर्ष से हैरान हैं। इस सर्वे से पता चलता है कि अक्सर एक सिक्के के दोनों तरफ संभावनाएं एवं जोखिम होते हैं। नक्शबंदी का कहना है एक तरफ भारत में वरिष्ठ प्रबंधक कहते हैं कि सरकार के साथ डील करने के मामले में भ्रष्टाचार का खतरा बढ़ जाता है, जबकि साथ ही साथ वे सरकार को समस्याओं का समाधान खोजने की प्रक्रिया का एक निर्णायक भागीदार मानते हैं।
अलायंस फॉर इंटेग्रिटी जर्मनी के आर्थिक सहयोग और विकास (बीएमजेड) संघीय मंत्रालय की ओर से वित्त पोषित एवं स्थापित है। सीआईआई और जर्मन इंडस्ट्रीज फेडरेशन के साथ सहयोग से अलायंस फॉर इंटेग्रिटी ने सितंबर और अक्तूबर 2014 के बीच यह सर्वे किया। सर्वे भारत में काम कर रही कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधकों के बीच किया गया, जिन्हें भ्रष्टाचार विरोधी नियमों के अनुपालन से संबंधित अनुभव थे।