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विदेशों में हाथों हाथ मांगे जा रहे नारियल के छिलके
अलपुजा (केरल)/विजय गुप्ता
Updated Mon, 04 Feb 2013 11:50 PM IST
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दुनिया भर में पर्यटन के लिए खास पहचान बना चुके केरल में नारियल आमदनी का एक बड़ा जरिया साबित हो रहा है। नारियल व गरी गोले का ठेका अब राज्य के लोगों व सरकार के लिए आय का प्रमुख स्रोत बन रहा है। नारियल के छिलके (कॉयर) के उत्पादों को विदेशी भी हाथोंहाथ ले रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में कॉयर के उत्पादों का निर्यात 12 सौ करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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केरल के राजस्व एवं कॉयर मंत्री अदूर प्रकाश ने बताया कि विदेशी बाजारों में भारतीय कॉयर से बने उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में इसके निर्यात में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस वर्ष कॉयर उत्पादों का निर्यात 12 सौ करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जबकि सरकार ने लक्ष्य एक हजार करोड़ का निर्धारित किया है।
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उन्होंने बताया कि निर्यातकों के आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किए जाने से न सिर्फ परंपरागत रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम आने वाली वस्तुओं का भी निर्माण किया जा रहा है। प्रकाश के मुताबिक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, चीन व खाड़ी देशों में कॉयर से बने उत्पादों की जबरदस्त मांग है। मौजूदा समय इन देशों को कॉयर से बने मैट, डोर मैट, टाइल्स, कारपेट, हैंड बैग, ज्वेलरी और फर्निसिंग के विभिन्न उत्पादों के साथ ही कॉयर पिख (खाद) का निर्यात हो रहा है।
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राज्य सरकार ने कॉयर से बने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए यहां कॉयर केरल एक्सपो 2013 का आयोजन किया है। इसमें उत्पादकों निर्माताओं और आयातक बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। नेशनल कॉयर रिसर्च एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (एनसीआरएमआई) के निदेशक अनिल केआर ने बताया कि इस साल कॉयर एक्सपो में 58 देशों के 172 आयातक भाग ले रहे हैं। पिछले वर्ष सिर्फ 72 आयातकों ने हिस्सा लिया था।
कॉयर उत्पादों की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गत वर्ष इसके उत्पादों का घरेलू कारोबार 2 हजार करोड़ रुपये का था, जो इस साल बढ़कर तीन हजार करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।