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मंजूरी की बाधाओं में फंसा कोल उत्पादन
सुजय मेहदूदिया, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Fri, 12 Sep 2014 09:08 PM IST
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कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों को पर्यावरण मंजूरी और फॉरेस्ट क्लियरेंस में देरी के साथ भूमि अधिग्रहण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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इसकी वजह से कोयला उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। सीआईएल ने कोयला मंत्रालय से कहा है कि इन मुद्दों को युद्ध स्तर पर सुलझाने की जरूरत है। सरकारी कंपनी का कहना है कि कोयला मंत्री द्वारा देश की बढ़्ती कोयला जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला उत्पादन बढ़ाना तभी संभव हो सकता है।
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सीआईएल और उसकी सब्सिडियरी कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए अपने प्रयासों में कई मुद्दों का सामना कर रहीं हैं।
कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने सीआईएल को एक वर्ष में कोयला उत्पादन 159 मिलियन टन (एमटी) तक बढ़ाने और थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की किल्लत को न्यूनतम करने को कहा है।
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कोयला मंत्रालय में जमा कराई गई सीआईएल और उसकी सब्सिडियरी की एक्शन टेकेन रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (सीसीएल) ने कहा है कि 18 प्रोजेक्ट के लिए भूमि का चिन्हीकरण, फॉरेस्ट एक्ट 2006 के तहत 9 प्रोजेक्ट के लिए सर्टिफिकेट जारी करने, और 6 प्रोजेक्ट की रेवेन्यू फॉरेस्ट लैंड के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र उसकी कोयला उत्पादन की क्षमता को मजबूत करने के लिए जारी किए जाने की जरूरत है।
वेस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) की बात करें तो उसके 42 फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्रस्ताव लंबित हैं। इसके अलावा इसके कई लंबित भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव और आरएंडआर इशूज हैं। कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए इनमें तेजी लाने की जरूरत है।
इसके अलावा डब्ल्यूसीएल ने उसकी खदानों को रिवर रेगुलेटरी जोन पॉलिसी के क्षेत्राधिकार से बाहर रखने की मांग की। इसके अलावा कंपनी ने आर्थिक रूप से वहनीय नहीं रहने वाले प्रोजेक्ट को खोलने के लिए कॉस्ट प्लस का मुद्दा सुलझाने की मांग की है। इससे कोयला उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी।
सीआईएल और इसकी सब्सिडियरी अपनी खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में भी दिक्कतों का सामना कर रहीं हैं। कई राज्य सरकारों द्वारा भूमि अधिग्रहण की गतिविधियों में सहयोग करने से मना कर दिए जाने के बाद भूमि का अधिग्रहण मुश्किल काम बन गया है।
इन्हीं दिक्कतों की वजह से इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) ने सोेनेपुर बाजारी, मोहन पुर और नकराकोंडा में भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव वापस लेकर सीधी खरीद के लिए जमीन मालिकों से बातचीत शुरू की है। इसी तरह से महानंदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल) अपने खनन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अपने कब्जे में लेने के लिए समस्याओं का सामना कर रही है क्योंकि ग्रामीण अपनी जमीन छोड़ने को लेकर उदासीन हैं।
इसके अलावा ग्रामीण अपनी जमीन दिए बिना रोजगार की मांग करते हुए खनन गतिविधियां रुकवाते रहते हैं। आईएल ने कहा है कि देश भर में अपनी अंडरग्रउंड माइन्स में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर कोयला उत्पादन में गिरावट के ट्रेंड को थामने का प्रयास कर रही है।
ताजी एक्शन टेकेन रिपोर्ट के अनुसार सीआईएल ने 20 माइन्स के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट और 11.385 एमटी क्षमता के 25 कांटीनुअस माइनर लगाने की मंजूरी दी है। मौजूदा समय में 2.835 एमटी क्षमता के कांटीनुअस मानइर को विभिन्न माइन्स में लगाया जा रहा है।
सीआईएल ने अंडरग्राउंड माइन्स से कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए लॉंग-वाल टेक्नोलॉजी द्वारा पांच माइन्स संचालित करने का आदेश जारी किया है। उम्मीद की जा रही है कि लॉंग-वाल टेक्नोलॉजी द्वारा पांच माइन्स का परिचालन उत्पादन 8.9 एमटी तक बढ़ाने में मदद करेगा।