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दूर के ढोल हैं फोन कंपनियों की तरह बिजली कंपनियां बदलना

Sun, 18 Jan 2015 07:54 PM IST
नई दिल्ली/राजीव कुमार
नई दिल्ली/राजीव कुमार Updated Sun, 18 Jan 2015 07:54 PM IST
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 chose among discoms implementation will not be smooth for govt
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कंपनियों की तरह बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) बदलने के सपने लोगों को जरूर दिखाए हैं, लेकिन ट्रांसमिशन नेटवर्क (इंफ्रास्ट्रक्चर) व बिजली की कमी की वजह से इस सपने को हकीकत में बदलने में कई साल लग जाएंगे।
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मुंबई में इस प्रकार का प्रयोग भी किया गया था, जो नेटवर्क सुविधा और कई तकनीकी वजहों से सफल नहीं हो सका।

सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ष 2003 में एनडीए की सरकार के दौरान बिजली कानून 2003 में एक मेगावाट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को ओपन एक्सेस देने का प्रावधान रखा गया था। लेकिन 11 साल बीत जाने केबाद भी इस प्रावधान को लागू नहीं किया जा सका।
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अलबत्ता ओपन एक्सेस को लागू करने के लिए कई राज्यों में प्रयास जरूर किए गए। बाद में कई राज्यों के बिजली नियामक आयोग ने ओपन एक्सेस को लागू करने से मना कर दिया। ओपन एक्सेस केमुताबिक एक मेगावाट से अधिक का उपभोक्ता देश के किसी भी राज्य से अपनी बिजली की खरीदारी कर सकता है।
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तेलंगाना बिजली नियामक आयोग के चेयरमैन आईए खान कहते हैं, ओपन एक्सेस में कई प्रकार की कठिनाइयां हैं। अगर कोई दिल्ली का उपभोक्ता हरियाणा की डिस्कॉम से बिजली की खरीदारी करता है, तो उस तक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की सुविधा और उस पर लगने वाले चार्ज का स्पष्टीकरण मुश्किल है।

दूसरी तरफ किसी दिन हरियाणा डिस्कॉम से बिजली नहीं मिलने की स्थिति में दिल्ली का वह उपभोक्ता कहां से बिजली लेगा। ऐसे में दिल्ली से बिजली खरीदने पर उसकी लागत बढ़ जाएगी। खान कहते हैं कि वैसे ही एक ही शहर में डिस्कॉम बदलने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को टेलीफोन कंपनियों के नेटवर्क की तरफ विकसित करना होगा।

बिजली संशोधित बिल के संसद में पारित होने के बाद कानून में बदलाव करना होगा। फिर नेटवर्क विकसित करने के लिए अलग कंपनियां बनेंगी। खान कहते हैं कि वे कंपनियां इतना निवेश करेंगी या नहीं, यह सब अभी काफी दूर की बात है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे के मुताबिक प्रधानमंत्री ने डिस्कॉम बदलने की जो बात कही है, उसे साकार होने में वर्षों लग सकते हैं। दुबे के मुताबिक बिजली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा वहां होगी, जहां बिजली की बहुलता हो।


डिस्कॉम के नेटवर्क में जब बिजली ही नहीं होगी तो बिजली कंपनियां बदलकर क्या लाभ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसमिशन नेटवर्क के विकास में सरकार निवेश करेगी और उसका फायदा इस क्षेत्र में आने वाली निजी कंपनियां उठाएंगी।
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