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चिट फंडः धोखा दिया तो पांच साल काटनी पड़ेगी जेल

Wed, 01 May 2013 08:14 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव Updated Wed, 01 May 2013 08:14 PM IST
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chit funds cheater punishment get five years jail

शारदा चिट फंड मामले से जागी सरकार वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए अब सख्ती करने के मूड में आ गई है।

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इसी के तहत अब सभी जांच एजेंसियों का एक उच्च स्तरीय स्थायी समन्वय समूह सरकार ने बना दिया है, जो कि हर महीने में वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में की जा रही कार्रवाई और नई शिकायतों की समीक्षा करेगा।

सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय जमा लेने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की भी जांच रिजर्व बैंक के अधिनियम 45 आई और 58 के तहत कर रहा है।

इसमें जो कंपनियां इन नियमों की दोषी पाई जाएंगी उनके प्रमोटर्स को मौजूदा नियमों के तहत एक से पांच साल तक की सजा भी मिल सकती है।

समन्वय समूह (कोऑर्डिनेशन ग्रुप) के तहत वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के अधिकारी सहित, सीबीडीटी, एसएफआईओ, कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय, सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जो कि वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई में तेजी ला सकेंगे।
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समन्वय समूह के बारे में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव टकरू ने अमर उजाला को बताया कि समूह बनाने का उद्देश्य आपस में समन्वय बढ़ाना है।
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केवल चिट फंड का मामला तो सीधे तौर पर राज्य सरकारों का मामला है, पर ऐसे मामले भी हैं जो कि इससे आगे के हैं, मसलन जहां सेबी, एसएफआइओ, आरबीआई सहित दूसरे विभाग अपने-अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं।

उनमें आपसी समन्वय की जरूरत है, जिससे जांच प्रक्रिया न केवल तेजी से हो सके बल्कि प्रभावी कदम भी उठाएं जा सकें। इसी के मद्देनजर समूह का गठन किया गया है। जिसकी अध्यक्षता वित्तीय मामलों के विभाग की अतिरिक्त सचिव करेंगी।

वित्त मंत्रालय की नजर गैर पंजीकृत कंपनियों पर
वित्त मंत्रालय बिना पंजीकरण कराए जमा लेने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां की शिनाख्त कर रहा है। इसके तहत पाई जाने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है।


सूत्रों के अनुसार इस तरह की कई कंपनियां हैं, जो कि रिजर्व बैंक में बिना पंजीकरण के भी जमाएं ले रही हैं। ऐसे में इन कंपनियों पर आने वाले दिनों में गाज गिर सकती है।

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