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चीन की मंदी से भारत पर भी पड़ेगा असर?

Thu, 16 Apr 2015 04:40 PM IST
एसडी गुप्ता/वरिष्ठ पत्रकार
एसडी गुप्ता/वरिष्ठ पत्रकार Updated Thu, 16 Apr 2015 04:40 PM IST
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चीन के आर्थिक रफ़्तार में गिरावट दिख रही है। इस साल की पहली तिमाही में चीन की आर्थिक प्रगति की दर सात फ़ीसदी रही है जो पिछले छह साल में सबसे कम है।

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इस साल ख़ुद चीन सरकार ने 7.5 फ़ीसदी की विकास दर का लक्ष्य रखा था। पिछले साल 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी फिर भी सरकार ने जानबूझकर अपना लक्ष्य 7.5 फ़ीसदी ही रखा था।
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साल के पहले तीन महीने बहुत अहम होते हैं। जनवरी से मार्च अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा समय माना जाता है।

ख़रीदारी पर असर
फ़रवरी महीने में चीन में सबसे बड़ा फ़ेस्टिवल होता है जिसमें काफ़ी ख़रीदारी होती है। इस दौरान ही सबसे ज़्यादा बोनस बांटे जाते हैं।

ऐसे में अगर ये तीन महीने ख़राब गए तो पूरा साल ख़राब जाने की संभावना बढ़ जाती है।

चीन सरकार को अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने का अंदेशा पहले से ही था, क्योंकि चीन की पूरी अर्थव्यवस्था निर्यात पर निर्भर है।

चीन में अंदरूनी खपत और माँग बहुत कम है। आम लोग बचत और किफ़ायत में यक़ीन रखते हैं। उनकी आय भी कम है।

लोगों के मन में डर
जब निर्यात में कमी आई तो चीनी सरकार ने प्रयास किया कि अंदरूनी खपत बढ़े, लेकिन लोगों के मन में एक तरह का डर बैठ गया और वो पैसा बचा रहे हैं।

ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन में डिफ़्लेशन हो रहा है। बाज़ार में पैसा कम है।

माना जा रहा है कि सरकार ब्याज़ दर को और गिराएगी। सरकार पहले ही इस साल दो बार ब्याज़ दर कम कर चुकी है।

ब्याज़ दर कम होने से उत्पादकों कम दाम में सामान बना सकेंगे और निर्यात कर सकेंगे।

भारत को तात्कालिक फ़ायदा
चीन की विकास दर के नीचे जाने से भारत और अन्य देशों को थोड़ा फ़ायदा होगा क्योंकि चीनी कंपनियाँ कुछ समय के लिए सस्ते दाम पर चीज़ें बेचेंगी।

लेकिन ये ज़्यादा देर तक नहीं चलेगा।कुछ समय के बाद इन कंपनियों को दाम बढ़ाना पड़ेगा। उसके बाद चीन से माल ख़रीदने वाले सभी देशों को नुकसान होगा।

इससे भी बड़ा नुकसान ये होगा कि भारत के कई बिजली एवं अन्य बड़े कारखाने चीन से आने वाले कल-पुर्जों पर निर्भर हैं।

ऐसे में चीन की कंपनियां अगर ये कल-पुर्जे बनाना बंद कर दें तो भारत के प्रोजेक्टों पर इसका असर पड़ सकता है।

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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