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बैंकों को नहीं मना पाए चिदंबरम, क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 17 Feb 2014 12:18 PM IST
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वित्तमंत्री पी. चिदंबरम सोमवार को अंतरिम बजट पेश करने वाले हैं। हालांकि पिछले बजट में किया गया उनका बैंकों के जरिए बीमा उत्पादों की पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का ऐलान पिछले एक साल में हकीकत की जमीन पर नहीं उतर सका है।
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इसके तहत बैंकों को बीमा ब्रोकर बना कर बीमा उत्पादों की पहुंच बढ़ाना था। वित्त मंत्रालय की लाख कोशिशों के बावजूद वह बैंकों को ऐसा करने के लिए अभी तक राजी नहीं कर पाया है। अब वित्त मंत्रालय और इरडा मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने की कवायद कर रहे हैं, जिससे बैंकों के सामने ब्रोकर बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।
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सूत्रों के अनुसार बैंकों को मार्च 2014 तक बीमा ब्रोकर खुद बनने का विकल्प दिया जाएगा। अगर वह खुद ऐसा नहीं करते हैं, तो वित्त मंत्रालय और इरडा के जरिए यह व्यवस्था की जाएगी कि उनके पास बीमा ब्रोकर बनने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाए।
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सरकार ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि बैंकों की खास तौर से सरकारी बैंकों की पहुंच छोटे शहरों, कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं ज्यादा है। ऐसे में बैंक बीमा कंपनियों के ब्रोकर बन आसानी से लोगों तक उत्पाद पहुंचा सकते हैं। फिलहाल बैंक कॉरपोरेट एजेंसी के मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसके तहत वह केवल एक बीमा कंपनी का ही उत्पाद बेच सकते हैं।
इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने बैंकों को 15 जनवरी 2014 तक बजट में की गई घोषणा के मुताबिक लागू करने को कहा था, पर बैंकों ने इसे लागू करने में असमर्थता जता दी है। इसके बाद एक बैंकों की एक छोटी समिति भी बनी है, जो इस अवरोध का समाधान निकालने कोशिश कर रही है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार बैंक अगर मार्च तक खुद नहीं तैयार होते हैं, तो उनका कॉरपोरेट एजेंसी मॉडल बदलने पर भी विचार हो सकता है, जिससे उन्हें खुद ही ब्रोकर बनना पड़ेगा।
इस मामले में एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बैंक अभी कॉरपोरेट एजेंसी मॉडल के तहत बीमा उत्पाद बेचने के लिए जवाबदेह नहीं हैं, पर ब्रोकर बनने पर उन्हें बीमा उत्पाद बेचना ही पड़ेगा।
जिसमें न तो बैंकों की विशेषज्ञता है और न हीं उनके पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा है। इसके अलावा कॉरपोरेट एजेंसी के तहत बैंकों के जिन बीमा कंपनियों के साथ समझौते हैं, उस पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस कारण बैंक ब्रोकर बनने को तैयार नहीं हो रहे हैं।