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चिदंबरम आज पेश करेंगे यूपीए-2 का आखिरी बजट

Thu, 28 Feb 2013 12:22 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 28 Feb 2013 12:22 AM IST
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chidambaram will present last budget of upa-2

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम बृहस्पतिवार को लोकसभा में आगामी वित्त वर्ष (2013-14) का बजट पेश करेंगे। वित्त मंत्री के सामने संकट में फंसी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती होगी।

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यूपीए-2 के कार्यकाल के इस अंतिम बजट में जहां चिदंबरम के सामने संकट में फंसी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए रास्ता तैयार करने का जिम्मा है, वहीं 2014 के आम चुनाव के पहले कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचाने की जमीन भी इस बजट में तैयार करनी है।
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हालांकि वह एक जिम्मेदार बजट पेश करने का बयान पिछले कुछ दिनों से दे रहे हैं लेकिन मध्य वर्ग को खुश करने के साथ ही यूपीए की फ्लैगशिप योजनाओं के जरिये वोटरों को रिझाने का मोह छोड़ने का जोखिम लेने की स्थिति में वह नहीं हैं।
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बुधवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में मिले संकेतों से साफ है कि चिदंबरम सब्सिडी के मोर्चे पर कुछ कड़ा कदम उठाएंगे और राजकोषीय घाटे को चालू साल के संभावित स्तर 5.3 फीसदी के मुकाबले अगले साल के लिए 4.8 फीसदी पर लाने की कोशिश करते दिखेंगे।

वित्त मंत्री के पास जो विकल्प हैं उनके तहत वह महंगाई बढ़ाने वाले कदमों पर बहुत आगे जाने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए मांग में इजाफा करने केमकसद के उपभोक्ताओं को कुछ राहत दे सकते हैं।

वित्त मंत्री लंबे समय से एक लाख रुपये पर अटकी कर छूट निवेश सीमा को बढ़ा सकते हैं। गिरती बचत और निवेश के बीच आर्थिक समीक्षा में भी इसकी सलाह दी गई है।

आयकर सीमा को बढ़ाने का चिदंबरम पर दवाब है क्योंकि मध्य वर्ग को खुश करने वाली इस मांग के तहत संसद की स्थायी समिति भी कर छूट सीमा को तीन लाख रुपये करने की सिफारिश पिछले साल कर चुकी है।

बजट में रहेंगी नजरें
- आवास ऋण पर चुकाए जाने वाले ब्याज की कर छूट सीमा पिछले एक दशक से डेढ़ लाख रुपये पर अटकी है। इसलिए इसमें कुछ बदलाव संभव है।
- सोने पर हो रहे अनुत्पादक निवेश पर अंकुश लगाने की कोशिश बजट में भी दिख सकती है।
- स्टॉक मार्केट और चिदंबरम के बीच खास रिश्ता रहा है और उनको बाजार का चहेता माना जाता है इसलिए बाजार को उठाने का कदम इस बजट में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में लाने की संभावना दिखेगी।

- कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को महत्व देने की कोशिश में खाद्य सुरक्षा कानून के लिए प्रावधान करने के साथ ही कृषि विपणन सुधारों के लिए उनकेपिटारे से कुछ न कुछ निकलना लगभग तय है।

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