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चिदंबरम जी ये 5 वादे कब करेंगे पूरे?

Fri, 14 Feb 2014 11:27 AM IST
Updated Fri, 14 Feb 2014 11:27 AM IST
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पिछले आम बजट में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की तमाम घोषणाएं सरकारी सुस्ती के चलते फाइलों में ही अटकी रह गई हैं। साल भर बाद भी कई घोषणाएं जमीन पर नहीं उतर पाई हैं।

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यह अधूरे वादे चुनाव की दहलीज पर खड़ी यूपीए सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर भारी पड़ सकते हैं। हालांकि, अंतरिम बजट में वित्त मंत्री का जोर नई घोषणाएं से ज्यादा सरकार की उपलब्धियों पर रहेगा, लेकिन सीधे नकद भुगतान (डीबीटी) जैसी योजनाओं की नाकामियों ने सरकार की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
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नकद भुगतान का खिसका आधार

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सीधे नकद भुगतान (डीबीटी) की योजना आधार कार्ड की उलझनों में फंसकर रह गई है। पिछले बजट में वित्त मंत्री ने इस योजना को पूरे देश में शुरू करने का ऐलान किया था। अभी तक देश के आधे जिलों में भी नकद भुगतान शुरू नहीं हुआ है।

पोस्ट-ऑफिस में कोर बैंकिंग अभी दूर

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देश के सभी डाकघरों को कोर बैंकिंग सर्विस (सीबीएस) से जोड़ा जाना था। पिछले बजट की यह घोषणा अभी तक पॉयलट प्रोजेक्ट से आगे नहीं बढ़ पाई।

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रोड रेगुलेटर अधर में

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साल भर योजना आयोग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की खींचतान में फंसा रहा रोड रेगुलेटर अब भी हकीकत से दूर है। एनएचएआई के होते एक नया नियामक बनाने के मुद्दे पर सरकार के अंदर ही सहमति नहीं बन पाई। यह चिदंबरम की अहम घोषणा थी।

10 हजार बसों का इंतजार

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वित्त मंत्री ने जेएनएनयूआरएम के तहत शहरों के लिए 10 हजार नई बसें खरीदने का ऐलान किया था। अभी तक नई बसें शहरों में चलनी शुरू नहीं हुई हैं। पूरे साल बसों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का काम ही चलता रहा। उत्तर भारत के राज्यों ने केंद्र की बसों में खास रुचि नहीं ली।

एसएमई के लिए नहीं बना फंड

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छोटे कारोबारियों की भुगतान समस्या सुलझाने के लिए 500 करोड़ रुपये का क्रेडिट गारंटी फंड बनाने का प्रावधान किया गया था। इसके जरिए सिडबी को फैक्टरिंग सेवाओं को बढ़ावा देना था। अभी तक गारंटी फंड कागजों पर ही बनता दिखा है।

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