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कांग्रेसी नेताओं को चिदंबरम ने बताई अपनी सीमाएं

Thu, 21 Feb 2013 03:56 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 21 Feb 2013 03:56 PM IST
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chidambaram described limitations congress leaders of budget

भले ही कांग्रेसी नेताओं ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम के सामने दिल खोलकर जनता के लिए सरकार का खजाना खोलने की मांग की हो। मगर वित्त मंत्री ने विश्वव्यापी आर्थिक मंदी और राजकोषीय घाटे के चलते सरकार की सीमाओं को जाहिर कर कांग्रेसी नेताओं को संकेत दे दिया है कि उनके पास इस बार ज्यादा करने की गुंजाइश नहीं है। हालांकि, चिदंबरम ने बजट में उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भरोसा दिलाया।

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बृहस्पतिवार को कांग्रेस मुख्यालय में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आगामी आर्थिक बजट को लेकर कांग्रेस नेताओं की राय सुनी। बैठक की शुरुआत में वित्त मंत्री ने कांग्रेसी नेताओं को विश्वव्यापी मंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के सामने कई मुश्किलें हैं। इनसे उबरना एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही उन्होंने बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर भी चिंता जताई।
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वहीं बैठक में शामिल ज्यादातर नेताओं ने ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की मांग की। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर भी नेताओं ने अपनी चिंता जाहिर की। बैठक में हुई चर्चा के बारे में जानकारी देते हुए कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि किसान, अल्पसंख्यक, आदिवासी, बुनकर, कृषि, ग्रामीण विकास में निवेश बढ़ाने पर बात हुई। राज्यों को दी जा रही मदद पर भी बात हुई।
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कई नेताओं ने आयकर में राहत देने की बात कही। कांग्रेसी नेता अजित जोगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आदिवासियों के लिए खास योजनाएं शुरू करने और उन्हें फंड देने की जरूरत है। बैठक में ज्यादातर महिला सदस्यों ने जेंडर बजट और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की वकालत की।


अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ईमरान किदवई ने अल्पसंख्यकों के लिए खास बजट का प्रावधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बुनकरों के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं। उनकी कर्ज माफी योजना को विस्तार देना चाहिए। वहीं कई सदस्यों ने केंद्र सरकार की योजनाओं पर अपना नाम लगाकर विपक्षी राज्यों की सरकारों के प्रचार अभियान का भंडाफोड़ करने की मांग की।

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