फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   chemists, druggists keep shutters down, patients suffer

केमिस्ट हड़ताल: 450 करोड़ का दवा कारोबार प्रभावित

Fri, 10 May 2013 10:39 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 10 May 2013 10:39 PM IST
विज्ञापन
chemists, druggists keep shutters down, patients suffer

नई दवा नीति के तहत दवा विक्रेताओं का मार्जिन कम होने से गुस्साए देश भर के केमिस्ट शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। राजधानी दिल्ली के अलावा विभिन्न जिला मुख्यालयों पर केमिस्टों ने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया।

विज्ञापन


दवा की दुकानें बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, बंद का आह्वान करने वाले संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रग्स्टि (एआईओसीडी) ने बड़े अस्पतालों पर कुछ दुकानें आपात स्थिति के लिए खुली रखने का दावा किया है। इस बंद से करीब 450 करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
विज्ञापन


पिछले कई वर्षों से लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को देश के तमाम शहरों में दवा की दुकानें बंद रहीं। आपात सेवाओं को ध्यान में रखते हुए एआईओसीडी ने एम्स जैसे बड़े अस्पतालों के आसपास कुछ दुकानें खुली रखने का फैसला किया। सरकार नई दवा नीति के तहत खुदरा बिक्री का मार्जिन 20 फीसदी से घटाकर 16 फीसदी और होलसेल का 10 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी करने जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एआईओसीडी के राष्ट्रीय महासचिव सुरेश गुप्ता ने दावा किया कि देश भर के 7 लाख से ज्यादा केमिस्ट शुक्रवार की हड़ताल में शामिल हुए। इससे करीब 450 करोड़ रुपये के दवा कारोबार पर असर पड़ा है। संगठन को मजबूरी में हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा। केमिस्ट पिछले कई साल से अपनी चार प्रमुख मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

नई दवा नीति में उनका मार्जिन बढ़ाने के बजाय करीब 6 फीसदी घटाया जा रहा है। वर्ष 2008 में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में संशोधन कर बेगुनाह दवा विक्रेताओं पर भी नकली दवा पकड़े जाने पर टाडा और पोटा जैसी सजा का प्रावधान कर दिया है।

इसे लेकर दवा विक्रेताओं में जबरदस्त रोष है। इसके अलावा दवा दुकानों के संचालन के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने और दवा की खुदरा बिक्री में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी न देने की मांग भी हड़ताल के प्रमुख मुद्दे हैं।


उधर, केंद्रीय दवा नियंत्रक डॉ. जीएन सिंह का कहना है कि दवा विक्रेताओं की कई मांगों पर विचार किया जा रहा हैं और इन पर उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने आम जनता की परेशानी को ध्यान में रखते हुए दवा विक्रेताओं तुरंत दवाओं की बिक्री शुरू करने को कहा है। नीति गत मामलों पर विचार-विमर्श चलता रहता है, हड़ताल करना कोई हल नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed