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बिजली खरीद-बिक्री के नियमों को उदार बनाने की तैयारी
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 19 Aug 2014 09:22 PM IST
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ऊर्जा क्षेत्र में सुधार लाकर उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों दोनों को ही सहूलियत देने के उद्देश्य से सरकार नियमों में कुछ बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इसके तहत सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन (सीईआरसी) कंपनियों के ट्रेडिंग मार्जिन संबंधी नियमों को उदार बनाने पर विचार कर रहा है।
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सीईआरसी का मानना है कि छोटी अवधि के लिए (शॉर्ट टर्म) ट्रेडिंग मार्जिन संबंधी नियमों को लचीला बनाने से कंपनियों और ग्राहकों दोनों को ही लाभ होगा। साथ ही इससे ऊर्जा क्षेत्र के हालात में भी सुधार लाया जा सकेगा। इसके तहत सीईआरसी कंपनियों को अपने ट्रेडिंग मार्जिन का आकलन अलग-अलग सौदों (कांट्रेक्ट) को समेकित करते हुए (एग्रीगेट) या अलग-अलग रख कर (डिसएग्रीगेट) करने की छूट देने पर विचार कर रहा है।
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सीईआरसी ने इस प्रस्ताव पर विभिन्न साझेदारों (स्टेक होल्डर्स) से राय मांगी है। इससे कंपनियों को विभिन्न उत्पादकों से अलग-अलग दरों पर बिजली खरीदकर किसी एक वितरक (डिस्कॉम) या ग्राहक को एक ही दर पर बेचने की सहूलियत मिल जाएगी। यह कीमत उत्पादकों को दी गई अलग-अलग कीमतों के औसत पर आधारित होगी। सीईआरसी ने अपने प्रस्ताव के ड्राफ्ट में इसे स्पष्ट किया है।
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ड्राफ्ट नोट के मुताबिक इसके तहत कंपनी के ट्रेेडिंग मार्जिन की गणना वितरक या ग्राहक से बिजली के लिए ली गई कीमत और बिजली उत्पादक कंपनियों से बिजली के खरीद मूल्य को समेकित करते हुए औसत मूल्य के बीच अंतर के आधार पर की जाएगी। सीईआरसी ने अपने ड्राफ्ट नोट में एक उत्पादक से बिजली खरीद कर अलग-अलग वितरकों या ग्राहकों को बेचने और अलग-अलग उत्पादकों से खरीद कर एक वितरक या ग्राहक को बेचने पर कंपनी के मार्जिन की गणना की विधि को वृहद रूप से समझाया है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई कंपनी 50 मेगावाट बिजली किसी कंपनी से 4 रुपये प्रति किलोवाट प्रति घंटे (केडब्ल्यूएच) पर, 40 मेगावाट बिजली 5 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच और 10 मेगावाट बिजली 6 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच की दर से खरीद कर सारी 100 मेगावाट बिजली को 4.65 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच की कीमत पर बेचता है, तो उसका ट्रेडिंग मार्जिन 0.05 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच होगा। यह उसके विक्रय मूल्य (4.65 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच) और खरीद की विभिन्न दरों के औसत 4.6 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच के बीच अंतर के बराबर होगा।
सीईआरसी के नोट में बताया गया है कि इस प्रस्ताव से बिजली के लोड के बेहतर प्रबंधन, ओपन एक्सेस को बढ़ावा देने और उत्पादित बिजली के बेहतर ढंग से उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही इससे नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल सकेगा, क्योंकि इससे कंपनियां विभिन्न प्रकार से बिजली बनाने वाली कंपनियों से बिजली खरीद कर उसे एक औसत दर पर बेच सकेंगी। इसके साथ ही नियमों में लचीलापन लाने से बिजली वितरण करने वाली कंपनियों को भी मांग और आपूर्ति में बेहतर संतुलन बनाने और लागत घटाने में मदद मिलेगी। इससे बिजली के ओपन एक्सेस को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि मार्जिन नियमों में लचीलापन आने से बिजली खरीदने वाली कंपनी थोक और खुदरा बिजली ग्राहकों के बीच एक कड़ी (लिंक) के रूप में काम कर सकेंगी।
गौरतलब है कि अब तक बिजली के क्षेत्र में एग्रीगेशन और डिसएग्रीगेशन की अनुमति नहीं थी। सब्सिडी से जुड़ी जटिलताओं और थोक खरीदारों का दबदबा कायम हो जाने जैसी आशंकाओं के चलते कंपनियों को इसकी इजाजत नहीं दी गई थी।