फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   CEO Modi sets 10 per cent efficiency increase target for the infrastructure sector

‘सीईओ मोदी’ ने रखा क्षमता में 10 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य

Wed, 03 Sep 2014 08:40 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Wed, 03 Sep 2014 08:40 AM IST
विज्ञापन
CEO Modi sets 10 per cent efficiency increase target for the infrastructure sector

देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने केंद्र में कामकाज की एक ऐसी प्रणाली खड़ी कर दी है, जिसमें ‘वन मैन शो’ की तर्ज पर वह कमोबेश अकेले ही हर मोर्चे पर एक्शन में दिखाई देते हैं। अपने ‘पीएम-अवतार’ में मोदी विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े मामलों में संबंधित मंत्रियों को भरोसे में लिए बिना अकसर मंत्रालय के सचिवों से सीधे संवाद करके कामों को अपने तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह कैबिनेट सचिव के समन्वय से केंद्र में एक ‘सुपर पीएमओ’ काम करता दिख रहा है।

विज्ञापन


बात चाहे मंत्रालयों और विभागों की कार्यदक्षता में सुधार लाने की हो या खुद पीएमओ की मोदी ने हाल के सप्ताहों में स्पष्ट संदेश दिया है कि वह चाहते हैं कि काम होते हुए दिखाई दें। मंत्रालयों से कहा गया है कि लॉबीबाजों (लॉबिस्ट), पीआर कंपनियों, नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों और सत्ता के दलालों (पावर ब्रोकर) से दूरी बनाकर रखें। मंत्रालयों का फोकस गवर्नेंस और केवल गवर्नेंस पर रहे।
विज्ञापन


अपने एक हालिया ‘वन मैन शो’ निर्देश में मोदी ने आधारभूत ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र के लिए कार्यदक्षता में 10 फीसदी बढ़ोतरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके दायरे में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय व उसके तहत आने वाली ओएनजीसी, ओआईएल, आईओसी जैसी सरकारी कंपनियां भी आती हैं। इनसे अपना स्टॉक बढ़ाकर ‘एक्शन मोड’ में आने को कहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रधानमंत्री मोदी इस वक्त किसी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तरह काम कर रहे हैं और कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ एक मॉनिटरिंग अथॉरिटी की भूमिका में है। ऐसे में संबंधित मंत्री और विभागाध्यक्ष की भूमिका केवल काम को निष्पादित करने वालों के रूप में दिखाई दे रही है। फैसलों के अनुरूप लक्ष्य हासिल किए जाते दिखाई दे रहे हैं और लक्ष्य के अनुरूप काम करने के लिए मंत्रालयों और विभागों को एक्सेल शीट तैयार करके भेजी जा रही हैं। विभिन्न मंत्रालयों के तहत आने वाली परियोजनाओं में सुपर पीएमओ किस तरह से रुचि ले रहा है इसकी ताजा मिसाल अर्से से अटकी पड़ी और मृतप्राय सी पड़ी 200 किलोमीटर की हल्दिया-जगदीशपुर गैस पाइपलाइन के मामले में देखने को मिला। करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का फैसला मोदी की कार्यशैली की एक स्पष्ट झलक देता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इस सेक्टर की कार्यदक्षता एक साल में 10 फीसदी बढ़ाने को कहा है। इसपर नजर रखने का जिम्मा वित्त मंत्रालय और योजना आयोग, जब तक कि वह अपने मौजूदा स्वरूप में कार्यरत है, को दिए जाने की संभावना है। केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न मुद्दों को सुलझाने के लिए मोदी ने कैबिनेट सचिव की देखरेख वाली एक साझा कार्यप्रणाली तैयार की है। इसके तहत कैबिनेट सचिव मंत्रालयों और राज्यों से बराबर बैठकें और बातचीत किया करेंगे। इन बैठकों में विभिन्न सेक्टरों से जुड़े मसलों पर चर्चा की जाएगी। यही प्रणाली अन्य सेक्टरों के लिए भी अपनाई जाएगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ही अन्य क्षेत्रों को भी अपने प्रदर्शन में 10 फीसदी तक का सुधार लाने का लक्ष्य दिया जा सकता है। इसमें खास बात यह है कि कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए मोदी की ओर से कोई खास क्षेत्र चिह्नांकित नहीं किया गया है। ऐसे में यह बहुत हद तक संबंधित मंत्रालयों पर निर्भर करेगा कि वह ऐसे क्षेत्रों या बिंदुओं का चुनाव कर उनमें प्रदर्शन को बेहतर बनाने का लक्ष्य हासिल करके दिखाएं। इसकी एक बानगी गैस के क्षेत्र में देखने को मिलती है। प्रदर्शन में सुधार लाने के लक्ष्य और ‘मेक इन इंडिया’ पर प्रधानमंत्री मोदी के जोर को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश की जरूरत की एक तिहाई द्रवीकृत प्राकृतिक गैस वाहक जहाजों (एलएनजी कैरियर) का घरेलू स्तर पर उत्पादन करने का लक्ष्य अपने लिए तय किया है।


सरकारी कंपनी गैस अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (गेल) से भी एलएनजी कैरियर की सेवाओं को लेकर निकाली गई उसकी हाल की निविदा में इससे संबंधित शर्त को शामिल करने को कहा गया है। गौरतलब है कि अमेरिका से एलएनजी को भारत लाने के लिए गेल हर साल 9 से 12 गैस वाहक जहाजों को काम पर लगाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed