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अवैध लौह उत्खनन की सीबीआई जांच हो: सीईसी
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Mon, 20 Oct 2014 09:00 AM IST
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ओडिशा में लौह अयस्क के अवैध उत्खनन के मामले को देखने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने जस्टिस शाह आयोग की सिफारिश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एसआईटी या सीबीआई द्वारा इस मामले की गहन जांच कराने की सिफारिश की है। जस्टिस शाह आयोग का गठन ओडिशा में निजी कंपनियों, व्यक्तियों और सरकारी कर्मचारियों की साठगांठ से किए जा रहे लौह उत्खनन की जांच करने के लिए किया गया था।
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सीईसी ने कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में केंद्र और राज्य सरकारों को ओडिशा में हो रहे अवैध लौह उत्खनन को रुकवाने का निर्देश दिए जाने की सिफारिश भी की है। साथ ही सीईसी ने अवैध उत्खनन में संलिप्त और वन संरक्षण अधिनियम (1980) का उल्लंघन कर उत्खनन करने वाली कंपनियों के पट्टे (लीज) रद्द किए जाने की भी सिफारिश की है। समिति ने जस्टिस शाह आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित लोगों सहित अवैध उत्खनन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश भी अपनी रिपोर्ट में की है।
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इसके अलावा सीईसी ने अवैध उत्खन से पर्यावरण पर पड़ रहे असर और पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ रहे उसके प्रभाव का व्यापक अध्ययन करने के लिए किसी सक्षम एजेंसी को नियुक्त करने की सिफारिश भी कोर्ट से की है। इस एजेंसी से पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण से संवेदनशील स्थानों की पहचान करवा कर उन स्थानों पर किसी भी प्रकार का उत्खनन न होने देने की सिफारिश भी कमेटी की ओर से की गई है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में लौह, मैग्नीज, बॉक्साइट आदि अयस्कों के उत्खनन की अधिकतम सीमा तय करने की सिफारिश भी की गई है।
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समिति ने इसके साथ ही सिफारिश की है कि सरकारों द्वारा 1957 के एमएमडीआर एक्ट की धारा 21 (5) के तहत अवैध उत्खनन के जरिए कमाई गई दौलत की रिकवरी करवाए जाने और इसमें संलिप्त लोगों पर मुकदमे दायर करवाने की सिफारिश भी की है।
समिति की सिफारिश के मुताबिक रिकवर की गई इस रकम का इस्तेमाल स्थानीय लोगों, ग्रामीणों और जनजातियों के कल्याण के कार्यों में किया जाए। साथ ही सरकारों को निर्देश दिया जाए कि वह अवैध उत्खनन से प्रभावित हुए इलाकों का संरक्षण और करे और 1988 में घोषित राष्ट्रीय वन नीति के मुताबिक इन क्षेत्रों में फिर से वन लगाए जाएं।
सीईसी ने सिफारिश की है कि जस्टिश शाह आयोग और ओडिशा सरकार की सिफारिशों के मुताबिक उत्खनन के नए पट्टों का आवंटन और पुराने पट्टों का नवीनीकरण प्रतिस्पर्धी बोलियों के आधार पर सार्वजनिक नीलामी के जरिए ही किया जाए, ताकि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके और राज्य को इससे आय हो सके।
समिति ने एक संयुक्त दल का गठन कर तयशुदा समय सीमा के भीतर सभी पट्टों के क्षेत्र का सीमांकन कराने की सिफारिश की है। लीज के क्षेत्र का उल्लंघन करके उत्खनन करने वालों के पट्टे तत्काल रद्द किए जाने की सिफारिश भी कमेटी की ओर से अपनी रिपोर्ट में की गई है।
इसके अलावा सीईसी ने आडिशा से लौह अयस्क के निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की गई है। ऐसी सिफारिश जस्टिस शाह आयोग और ओडिशा सरकार की ओर से भी की जा चुकी है। समिति ने कर्नाटक की तरह ही ओडिशा में भी लौह अयस्क की बिक्री केवल ऑनलाइन नीलामी (ई-ऑक्शन) के जरिए ही किए जाने की सिफारिश भी की है।