{"_id":"0e4d6100-cb93-11e2-80c9-d4ae52bc57c2","slug":"cattles-sold-for-ghee-investments-sebi-sees-ponzi-at-play","type":"story","status":"publish","title_hn":"पशुओं और उनके घी के नाम पर करोड़ों की अवैध उगाही","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
पशुओं और उनके घी के नाम पर करोड़ों की अवैध उगाही
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sun, 02 Jun 2013 08:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाजार की निगरानी करने वाली संस्था सेबी ने सार्वजनिक जमा पूंजी के जरिए अवैध रूप से करोड़ों रुपये जुटाने के मामले में एक कंपनी को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
सेबी ने एचबीएन डेयरीस एंड एलाइड लिमिटेड को समूह गत निवेश योजना (सीआईएस) के नियमों का उल्लंघन कर अवैध निवेश के लिए नोटिस जारी किए हैं। सेबी सीआईएस को नियंत्रित करती है।
विज्ञापन
सेबी के पास निवेशकों ने शिकायत की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने निवेशकों से पशुओं की खरीद के लिए उपर्युक्त राशि ले उन्हें एक निश्चित अवधि में दो गुना राशि लौटाने का वादा किया।
विज्ञापन
कंपनी ने कहा था कि पशुओं और उनके दूध से बने घी की बाजार में बिक्री के आधार पर उन्हें दो गुना राशि दी जाएगी। सेबी ने ऐसी फर्जी स्कीम को सार्वजनिक करते हुए कंपनी की वित्तीय गड़बड़ी को उजागर किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
सेबी के अनुसार कंपनी ने 31 मार्च 2011 तक निवेशकों से करीब 745 करोड़ रुपए जुटाए। सेबी के अनुसार कंपनी ने सीआईएस से जुड़े बगैर इस तरह का निवेश किया।
सेबी ने कंपनी के निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया लेकिन सभी नोटिस निदेशकों के पते में बदलाव के बाद वापस आ गए।
पिछले माह सेबी ने इस मामले में एक और नोटिस कंपनी को जारी किया जिसमें बाजार नियंत्रक ने निदेशक से अपने सामने पेश होने को 29 मई का समय दिया।
एचबीएन डेयरीस एंड एलाइड लिमिटेड के कम से कम तीन निदेशकों को नोटिस भेजा गया लेकिन उन्हें वह नहीं मिल पाया। कंपनी से जब इस संबंध में संपर्क किया गया तो कोई जवाब नहीं मिला।
कंपनी की वेबसाइट में दिए गए फोन नंबरों पर भी बात नहीं हो सकी। नई दिल्ली की एचबीएन अपने आपको डेयरी व्यवसाय से 90 के दशक से जुड़ा बताती है।
कंपनी के हरियाणा के समालखा और गन्नौर सहित अन्य स्थानों में डेयरी फार्म हैं। कंपनी ने पशुओं की खरीद के नाम पर पैसे जुटाए और परिपक्व अवधि में राशि के दो गुना होने का वादा भी किया। एक माह से नौ साल की अवधि के तहत निवेशकों से निवेश कराया गया।
निवेशकों से कहा गया कि एक माह में ही उनकी रकम बाजार में पशुओं और उनके द्वारा पैदा हुए घी की कीमत के आधार पर बढ़ जाएगी।
एचबीएन ने नोटिस पर पहले तो सेबी से जुड़ना चाहा पर जब बाद में और पूछताछ की गई तो उसके निदेशकों के पते बदल गए। उसने सेबी से जुड़ने की इच्छा भी रद्द कर दी।
नोटिस का जवाब देने के लिए कुछ दिन का समय मांगा। सेबी ने निदेशकों से कहा है कि इस तरह का उल्लंघन करने पर क्यों न उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्या कहती है एचबीएन कंपनी की बैलेंस शीट
सेबी का कहना है कि कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार 31 मार्च 2011 को समाप्त वित्तीय वर्ष तक 745 करोड़ रुपये निवेशकों से एडवांस में लिए गए। 31 मार्च 2010 को यह राशि 529 करोड़ रुपये थी। इस तरह 2010 से 2011 के बीच यानी एक साल में ही कंपनी ने 216 करोड़ रुपये की कमाई कर ली।
बीटल ने बकरी पालन पर लिए पैसे
सेबी ने एक अन्य कंपनी बीटल लाइव स्टोक एंड फार्म प्रायवेट लिमिटेड को भी नोटिस जारी किया है। इसने बकरी पालन के नाम पर निवेशकों से रकम जुटाई। बीटल भी सीआईएस से किसी भी तरह संबंधित नहीं हैं। कंपनी ने बकरी के नाम पर निवेशकों से रकम ली।
कंपनी ने निवेशकों से कुछ हजार रुपये देकर बकरियों के मालिक बनने को कहा। निवेशकों को बताया गया कि प्रत्येक बकरी एक साल में चार बच्चों को जन्म देगी। इन बच्चों को किसी नए निवेशक को बेचा जाएगा और इस तरह एक बकरी एक साल में सोलह बकरियों के बराबर रकम एक साल में ही जुटा लेगी।
सूत्रों के अनुसार ऐसी स्कीम दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में आज भी चलाई जा रही है।