कैश संभालने में 21 हजार करोड़ होते हैं खर्च
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भारतीय रिजर्व बैंक और कॉमर्शियल बैंक हर साल करीब 21 हजार करोड़ रुपए सिर्फ पैसों के रख-रखाव में खर्च कर रहे हैं। इसमें सिर्फ दिल्ली में ही पैसों के रख-रखाव में 9.1 करोड़ रुपए का खर्च आता है। साथ ही, इसमें 60 लाख घंटों का समय भी लगता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक, भारत में इस तरह से पैसों के रख-रखाव (कैश हैंडलिंग) पर होने वाले खर्च ने भारत को ऐसी इकोनॉमी बना दिया है, जहां पर अधिकतर काम कैश के जरिए होता है, न कि इंटरनेट बैंकिंग या कार्ड से। इसके साथ ही भारत का कैश टू जीडीपी रेश्यो 12 प्रतिशत हो गया है, जो ब्राजील (3.93%), मैक्सिको (5.3%) और दक्षिण अफ्रीका (3.73%) का करीब चार गुना है।
क्यों करना पड़ रहा है इतना खर्च
भारत की तरफ से कैश हैंडलिंग में इतना अधिक खर्च होने के कई कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि भारत में नोटों को सही से न संभालने की वजह से वो खराब हो जाते हैं, जिसे फिर से इश्यू करना पड़ता है।
पुराने नोट से जुड़ी सुरक्षा भी कैश हैंडलिंग को बढ़ा रही है। पुराने नोटों को सुरक्षा के नए फीचर्स की वजह से रिप्लेस भी करना पड़ता है। पुराने नोटों को वापस मंगाने और फिर उन्हें बदलने में काफी अधिक पैसे खर्च होते हैं।
इतना ही नहीं, भारत में कैश को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना भी कई जगह चुनौती भरा होता है। कई जगहों पर पैसों को हेलिकॉप्टर से पहुंचाना पड़ता है।
क्या कहती है रिपोर्ट
कॉस्ट ऑफ कैश इन इंडिया रिपोर्ट के अनुसार कैश हैंडलिंग का खर्च बढ़ने का एक कारण यह भी है कि भारत की लगभग एक तिहाई आबादी बैंकिंग से जुड़ी नहीं है और करीब पिछले 15 सालों से बैंक अकाउंट का इस्तेमाल ही नहीं कर रही है।
यह रिपोर्ट इंस्टिट्यूट फॉर बिजनेस इन द ग्लोबल कॉन्टैक्स्ट ने मास्टर कार्ड के लिए बनाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही पिछले कुछ सालों में मोबाइल बैंकिंग में बढोतरी हुई है, लेकिन इसे अभी भी भुगतान के लिए बहुत कम इस्तेमाल किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट में 2007 से 2012 तक 2.6 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
बढ़ गया है एटीएम का इस्तेमाल
एटीएम के जरिए ट्रांजैक्शन करने की लागत में भी 6 गुना की बढ़ोतरी हुई है। 2007 में जहां सिर्फ 3 लाख करोड़ रुपयों का ट्रांजैक्शन एटीएम से होता था, 2012 में यह बढ़कर 18 लाख रुपए हो गया है।
रिजर्व बैंक के अनुसार 2013 में करीब 15,400 करोड़ रुपयों के बैंक नोट दुनियाभर में इश्यू किए गए थे, जिसमें से 5,400 करोड़ रुपए चीन और 2,000 करोड़ रुपए भारत की तरफ से इश्यू किए गए थे।