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कॉल ड्रॉप की लगातार बढ़ रही है समस्या

Sat, 15 Nov 2014 09:07 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Sat, 15 Nov 2014 09:07 AM IST
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call drop problem increasing

टेलीकॉम उपभोक्ताओं के सामने कॉल न लगने या बीच में ही कट जाने (कॉल ड्रॉप) की बढ़ती समस्या पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने चिंता जताई है। टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन पर ट्राई की ओर से जारी तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक जून में समाप्त तिमाही के दौरान कॉल ड्रॉप की समस्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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ट्राई की टेलीकॉम सर्विस परफार्मेंस इंडिकेटर रिपोर्ट के मुताबिक 3जी ऑपरेटरों में जून में समाप्त तिमाही के दौरान कॉल ड्रॉप की दर 14 फीसदी रही। मार्च तिमाही के दौरान कॉल ड्रॉप की दर 9 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्वे किए गए 94 3जी ऑपरेटरों में दो ऑपरेटर ऐसे भी निकले, जो बेसिक कॉल के लिए जरूरी सेटअप भी स्थापित नहीं कर सके हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक 2जी सेवाओं के मामले में 183 सेवा प्रदाताओं में से 24 यानी करीब 13 फीसदी ऑपरोटरों की सेवाओं में कॉल ड्रॉप की समस्या 3 फीसदी की तयशुदा अधिकतम सीमा से अधिक रही। मार्च तिमाही में 3 फीसदी से ज्यादा कॉल ड्रॉप वाले ऑपरेटरों का अनुपात 6 फीसदी ही था।
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इस तरह 2जी सेवाओं में तय सीमा से ज्यादा कॉल ड्राप की समस्या वाले ऑपरेटरों की संख्या में दो गुनी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में टेलीकॉम उपभोक्ताओं को फोन लगाने पर ‘जिस उपभोक्ता को आप कॉल लगा रहे हैं, उससे अभी संपर्क नहीं हो सकता’ का मैसेज ज्यादा सुनने को मिल रहा है।

केपीएमजी में पार्टनर जयदीप घोष का कहना है कि कॉल ड्रॉप की समस्या केवल क्षमता से जुड़ा मामला नहीं है। यह समस्या कवरेज से जुड़ी भी हो सकती है, जिसकी वजह टॉवरों की स्थापना के वक्त कंपनी की ओर से ठीक ढंग से व्यवस्थाएं न किया जाना भी हो सकता है। यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में हो सकती है।

टेलीकॉम ऑपरेटरों की संस्था सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के एक प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या कंपनियों को चिंतित कर रही है। उन्होंने ग्राहकों की बढ़ती संख्या के बजाय अपर्याप्त स्पेक्ट्रम और टॉवरों की संख्या में कमी को इसकी मूल वजह बताया।


उन्होंने बताया कि एक टावर के जरिए 20,000 ग्राहकों को सेवाएं दी जा सकती हैं। ग्राहकों की संख्या इससे ऊपर जाने पर आसपास में दूसरा टावर लगाने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि नए टावर लगाने में दो तरह की परेशानी पेश आती है। पहली समस्या स्थानीय प्रशासन से इसके लिए मंजूरी हासिल करने की होती है। दूसरी समस्या मोबाइल टावर को लेकर लोगों में स्वास्थ्य समस्या संबंधी आशंकाओं का जोर पकड़ना है। ऐसे में कंपनियां कई बार लोड बढ़ने पर भी नया टावर नहीं लगा पाती हैं।

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