{"_id":"2611dfb78f572c2f429feba095b7cb68","slug":"cairn-pipeline-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केयर्न की पाइपलाइन पर राजस्थान का अड़ंगा","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
केयर्न की पाइपलाइन पर राजस्थान का अड़ंगा
New Delhi
Updated Wed, 31 Dec 2014 06:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केयर्न की पाइपलाइन पर राजस्थान का अड़ंगा
राजस्थान सरकार नहीं चाहती है राज्य से बाहर गैस भेजना
डीजीएच ने भी राजस्थान सरकार के रूख का समर्थन किया
नई दिल्ली। केयर्न के बाड़मेर स्थित रागेश्वरी डीप गैस (आरडीजी) ब्लॉक से पालनपुर गुजरात स्थित गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) के गैस ग्रिड तक पाइपलाइन बनाने की योजना पर राजस्थान सरकार ने अड़ंगा लगा दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि बाड़मेर से निकली गैस का उपयोग राज्य में होना चाहिए, राज्य से बाहर नहीं। देश के हाइड्रोकार्बन महानिदेशक (डीजीएच) ने भी ब्लॉक के प्रोडक्ट शेयरिंग कांट्रेक्ट का हवाला देते हुए पालनपुर डिलीवरी प्वाइंट का विरोध किया है।
केयर्न इंडिया ने रागेश्वरी डीप ब्लॉक में करीब ६९४ मिलियन डालर के निवेश की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है जिसमें वहां ३७ नए गैस कुओं का खनन किया जाएगा और वहां से करीब २०० किलोमीटर लंबे पाइपलाइन का निर्माण शामिल है। कंपनी ने ३० इंच ब्यास वाले पाइपलाइन डालने की योजना बनायी है ताकि बाड़मेर से निकले गैस को गुजरात स्थित डिलीवरी प्वाइंट तक पहुंचाया जा सके। इस क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक वहां जो नया निवेश किया जाएगा, उससे भारी मात्रा में गैस का उत्पादन संभव हो सकेगा। इस समय बाड़मेर के आसपास के इलाकों में गैस पर आधारित उद्योग धंधों की अनुपलब्धता होने की वजह से गैस बाहर बेचना जरूरी है। तभी तो पालनपुर तक पाइपलाइन बिछाने की येाजना बनायी गई क्योंकि यही सबसे नजदीकी गैस ग्रिड है।
राजस्थान सरकार ने केयर्न की इस योजना पर अड़ंगा लगा दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि बाड़मेर से निकली गैस का उपयोग राज्य में ही हो। राज्य से बाहर ले जा कर गैस बेचने की वह कतई अनुमति नहीं देगी। राज्य सरकार ने केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से भी अनुरोध किया है कि बाड़मेर से गैस बाहर निकालने के लिए पाइपलाइन बनाने की किसी भी फैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें भी शामिल किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस समय आरडीजी से निकले गैस का सिर्फ एक ही डिलीवरी प्वाइंट है जो कि वहीं है। राज्य सरकार चाहती है कि बाड़मेर के अलावा कहीं डिलीवरी प्वाइंट नहीं बने।
विज्ञापन
हाइड्रोकार्बन महानिदेशक (डीजीएच) का रूख भी राजस्थान सरकार के समर्थन में जाता है। डीजीएच ने केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को सूचित किया है कि केयर्न के राजस्थान ब्लॉक के लिए हुए प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रेक्ट (पीएससी) के मुताबिक वहां से निकली गैस की डिलीवरी प्वाइंट सिर्फ बाड़मेर में हो सकता है, कहीं और नहीं। उन्होंने पीएससी की धारा १.२३ के हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि रागेश्वरी ब्लॉक के लिए डिलीवरी प्वाइंट गैस क्षेत्र से बाहर नहीं होना चाहिए। पालनपुर वहां से २०० किलोमीटर दूर है इसलिए वहां डिलीवरी प्वाइंट बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
--शिशिर चौरसिया--
विज्ञापन
राजस्थान सरकार नहीं चाहती है राज्य से बाहर गैस भेजना
डीजीएच ने भी राजस्थान सरकार के रूख का समर्थन किया
नई दिल्ली। केयर्न के बाड़मेर स्थित रागेश्वरी डीप गैस (आरडीजी) ब्लॉक से पालनपुर गुजरात स्थित गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) के गैस ग्रिड तक पाइपलाइन बनाने की योजना पर राजस्थान सरकार ने अड़ंगा लगा दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि बाड़मेर से निकली गैस का उपयोग राज्य में होना चाहिए, राज्य से बाहर नहीं। देश के हाइड्रोकार्बन महानिदेशक (डीजीएच) ने भी ब्लॉक के प्रोडक्ट शेयरिंग कांट्रेक्ट का हवाला देते हुए पालनपुर डिलीवरी प्वाइंट का विरोध किया है।
केयर्न इंडिया ने रागेश्वरी डीप ब्लॉक में करीब ६९४ मिलियन डालर के निवेश की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है जिसमें वहां ३७ नए गैस कुओं का खनन किया जाएगा और वहां से करीब २०० किलोमीटर लंबे पाइपलाइन का निर्माण शामिल है। कंपनी ने ३० इंच ब्यास वाले पाइपलाइन डालने की योजना बनायी है ताकि बाड़मेर से निकले गैस को गुजरात स्थित डिलीवरी प्वाइंट तक पहुंचाया जा सके। इस क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक वहां जो नया निवेश किया जाएगा, उससे भारी मात्रा में गैस का उत्पादन संभव हो सकेगा। इस समय बाड़मेर के आसपास के इलाकों में गैस पर आधारित उद्योग धंधों की अनुपलब्धता होने की वजह से गैस बाहर बेचना जरूरी है। तभी तो पालनपुर तक पाइपलाइन बिछाने की येाजना बनायी गई क्योंकि यही सबसे नजदीकी गैस ग्रिड है।
विज्ञापन
राजस्थान सरकार ने केयर्न की इस योजना पर अड़ंगा लगा दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि बाड़मेर से निकली गैस का उपयोग राज्य में ही हो। राज्य से बाहर ले जा कर गैस बेचने की वह कतई अनुमति नहीं देगी। राज्य सरकार ने केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से भी अनुरोध किया है कि बाड़मेर से गैस बाहर निकालने के लिए पाइपलाइन बनाने की किसी भी फैसले लेने की प्रक्रिया में उन्हें भी शामिल किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस समय आरडीजी से निकले गैस का सिर्फ एक ही डिलीवरी प्वाइंट है जो कि वहीं है। राज्य सरकार चाहती है कि बाड़मेर के अलावा कहीं डिलीवरी प्वाइंट नहीं बने।
विज्ञापन
हाइड्रोकार्बन महानिदेशक (डीजीएच) का रूख भी राजस्थान सरकार के समर्थन में जाता है। डीजीएच ने केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को सूचित किया है कि केयर्न के राजस्थान ब्लॉक के लिए हुए प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रेक्ट (पीएससी) के मुताबिक वहां से निकली गैस की डिलीवरी प्वाइंट सिर्फ बाड़मेर में हो सकता है, कहीं और नहीं। उन्होंने पीएससी की धारा १.२३ के हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि रागेश्वरी ब्लॉक के लिए डिलीवरी प्वाइंट गैस क्षेत्र से बाहर नहीं होना चाहिए। पालनपुर वहां से २०० किलोमीटर दूर है इसलिए वहां डिलीवरी प्वाइंट बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
--शिशिर चौरसिया--