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टेलीकॉम कंपनियों पर फिर सीएजी का वार

Wed, 29 May 2013 08:57 PM IST
नई दिल्ली/रक्षित सिंह
नई दिल्ली/रक्षित सिंह Updated Wed, 29 May 2013 08:57 PM IST
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cag strict on telecom companies

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर उंगली उठाई है।

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सीएजी ने कहा है कि कई टेलीकॉम कंपनियां टेलीकॉम नियामक ट्राई के सेवाओं के गुणवत्ता के पैमानों पर खरी नहीं उतरी हैं। इसके चलते ग्राहकों को घटिया स्तर की सेवाएं मिली हैं। इसके अलावा सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान हुआ है।

सीएजी ने 20 मई 2013 को दूरसंचार विभाग के सचिव और टेलीकॉम कमिशन के चेयरमैन एमएस फारुखी को इस संबंध में पत्र लिखा है।

महानिदेशक लेखापरीक्षक, डाक व दूरसंचार (सीएजी की इकाई) ने कहा है कि दूरसंचार विभाग के उपयुक्त निर्णय न लेने के चलते देश में बड़ी मात्रा में 2जी स्पेक्ट्रम बर्बाद हो रहा है।
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इस मामले की जानकारी दूरसंचार विभाग और ट्राई को मार्च 2013 में दे दी गई थी, लेकिन अभी तक इस संबंध में उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है।

ट्राई ने मोबाइल सेवाओं और लैंड लाइन सेवाओं के लिए गुणवत्ता के पैमाने तय किए हुए हैं। इन पैमानों पर सभी टेलीकॉम कंपनियां अपनी मासिक या त्रैमासिक रिपोर्ट ट्राई को देती हैं।
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सीएजी ने आरोप लगाया है कि पिछली कुछ तिमाहियों की रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर पता चला है कि कई टेलीकॉम कंपनियां तयशुदा मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं।

इसके अलावा इन पैमानों को लेकर कंपनियों की सेवाओं की गुणवत्ता में कोई खास सुधार भी नहीं हुआ है। सीएजी ने कहा है कि टेलीकॉम कंपनियां समय-समय पर अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की मांग करती रही हैं, लेकिन जब बोली प्रक्रिया के जरिए स्पेक्ट्रम हासिल करने का मौका मिला, तो कंपनियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।

सीएजी ने कहा है कि भारती एयरटेल ने 2008-2011 के बीच 21 सेवा क्षेत्रों में अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए 68 बार दरख्वास्त की लेकिन कंपनी ने नवंबर 2012 में बोली प्रक्रिया में सिर्फ असम सेवा क्षेत्र के लिए 1.25 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम हासिल किया।

इसी तरह आइडिया सेल्यूलर फरवरी 2009 से मुंबई सेवा क्षेत्र के लिए लगातार अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की मांग कर रही थी, लेकिन आइडिया ने मुंबई के लिए हालिया बोली प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और न ही कंपनी ने 2010 में 3जी स्पेक्ट्रम हासिल किया। सीएजी ने इसी तरह वोडाफोन, रिलायंस कम्युनिकेशन, टाटा टेली सर्विसेज आदि कंपनियों के उदाहरण दिए हैं।

2जी स्पेक्ट्रम का अकुशल प्रबंधन
सीएजी ने कहा है कि दूरसंचार विभाग ने अकुशल तरीके से 2जी स्पेक्ट्रम का प्रबंधन किया है, जिसके चलते सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है और ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाएं नहीं मिल सकीं।

सीएजी ने कहा है कि टेलीकॉम कंपनियां सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर बार-बार अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की मांग करती रही हैं। लेकिन, जब बोली प्रक्रिया के जरिए स्पेक्ट्रम लेने की बारी आई तो ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनियों ने कार्टल बनाकर बोली प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।


सीएजी ने कहा कि सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की जरूरत थी लेकिन बाजार भाव पर कंपनियों ने बोली प्रक्रिया के जरिए स्पेक्ट्रम लेने में रुचि नहीं दिखाई।

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